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देश के लिए 18 साल तक खतरा बना रहा अब्दुल मजीद, अब पूछताछ में उगली सच्चाई तो अफसर हैरान

Tue, 30 Jul 2019 01:10 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: कपिल kapil Updated Tue, 30 Jul 2019 01:10 AM IST
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Many secret open after arrested of Abdul Majid in Shamli district
पकड़ा गया आरोपी - फोटो : अमर उजाला

शामली जिले के जलालाबाद में पकड़े गए म्यांमार के मूल निवासी अब्दुल मजीद से पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई हैं। वह करीब 18 साल पहले भारत में अपने पिता और भाई के साथ घुसा था। तब से वह देश के कई राज्यों में इधर से उधर घूमता रहा और किसी की पकड़ में नहीं आया। पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ फर्जी सूचनाओं पर भारतीय दस्तावेज हासिल करने पर कई विभागों की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में आ गई है।

Many secret open after arrested of Abdul Majid in Shamli district
शामली में स्थित मस्जिद - फोटो : अमर उजाला

पुलिस के मुताबिक अब्दुल मजीद के 2001 में अपने पिता और एक भाई के साथ बांग्लादेश के नाकूरा के रास्ते से बिलोनिया बॉर्डर को अवैध रूप से पार कर कोलकाता पहुंचा। वहां पर कुछ दिन रहने के बाद उत्तर प्रदेश में आया। 2004 में शामली पहुंचा और इसके बाद कर्नाटक, उज्जैन समेत कई स्थानों पर घूमता रहा। उसने शामली में फर्जी सूचनाओं और दस्तावेजों के आधार पर पैन कार्ड, एक ही नंबर के दो आधार कार्ड बनवाए और दो बैंकों में खाते भी खुलवा लिए। अपने भाई को भारत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मलेशिया में नौकरी पर भेजने में सफल हो गया।

Many secret open after arrested of Abdul Majid in Shamli district
पकड़े गए आरोपी - फोटो : अमर उजाला

पुलिस के मुताबिक कस्बा जलालाबाद में 2016 से मई 2019 तक वासिफ अमीन निवासी मोहल्ला खैरातियान जलालाबाद द्वारा संचालित मदरसा दारुल उलूम जलालाबाद में मुफ्ती उस्ताद बनकर पढ़ाया। उसके बाद कुछ दिन से कारी असरफ निवासी मोहल्ला हाफिज दोस्त थानाभवन द्वारा संचालित मदरसा जामिया असरफिया कस्बा थानाभवन में पढ़ा रहा था। पूछताछ में पता चला कि अब्दुल मजीद के पिता का निधन हो चुका है। उसने जलालाबाद की खुशनुमा कॉलोनी में करीब पांच लाख 60 हजार रुपये में मकान भी खरीद लिया। इतना सब कुछ होने के बाद भी किसी को उसके अवैध रूप से रहने की भनक तक नहीं लगी।

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Many secret open after arrested of Abdul Majid in Shamli district
इसी कमरे में रहता था आरोपी - फोटो : अमर उजाला

ये उठे सवाल
- रोहिंग्या के फर्जी दस्तावेज कैसे बन गए।
- आखिर इन्हें बनवाने के पीछे किसका हाथ है।
- इतने साल से ये पकड़ में क्यों नहीं आया।
- स्थानीय पुलिस की नजरों से कैसे बचा रहा।
- भाई को मलेशिया में नौकरी के लिए कैसे भेजा।
- अपने साथियों को बुलवाया तो कहीं जांच क्यों नहीं हुई।

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Many secret open after arrested of Abdul Majid in Shamli district
गिरफ्तार किए गए आरोपी - फोटो : अमर उजाला

मुफ्ती की डिग्री दिलाने के बहाने तीनों भाइयों को भी बुलाया
म्यांमार के तीनों भाई रिजवान, नोमान और फुरकान ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उन्होंने म्यांमार ने इफ्ता का कोर्स कर लिया था। एसपी के मुताबिक यहां पहले से रह रहे अब्दुल मजीद का इनका संपर्क हुआ था। उसने जलालाबाद के मदरसे में मुफ्ती की डिग्री और दीनी तालीम देने के लिए बुलाया था। तीनों भाई यहां टूरिस्ट वीजा पर पहुंचे थे। मगर छह माह से एक साल पहले वीजा अवधि खत्म होने के बाद से उन्होंने नाम बदलकर शरणार्थी का दर्जा पाने के लिए संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) में रजिस्ट्रेशन कराने में सफलता प्राप्त कर ली। अगले महीने उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। अब्दुल मजीद और तीनों भाइयों ने भारत में आने और यहां रहने के संबंध में नियमानुसार संबंधित विभाग को या पुलिस को जानकारी नहीं दी थी। रिजवान और फुरकान मदरसा मिफ्ता उल उलूम जलालाबाद मदरसे के हॉस्टल में पहली मंजिल पर रह रहे थे। मदरसे के मोहतमिम की तरफ से भी पुलिस को जानकारी नहीं दी गई।

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