पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के बाद लगी आग में कई परिवारों की छोटी- छोटी खुशियां भी खाक हो गई। मुसीबत का पहाड़ उन पर टूट पड़ा है। मासूम बच्चों से मां की ममता छीन गई है तो, मजदूरी कर परिवार के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम करने वाली भी नहीं रहीं। अब इन तीन परिवारों के बच्चों की परवरिश कैसे होगी, कैसे होगी परिवारों की गुजर बसर, यह चिंता गहरा गई है।
मासूमों से छिन गई मां की ममता, परिवार से रोटी, मजदूरी कर पालन-पोषण करती थीं महिलाएं, तस्वीरें
शामली में दिल्ली- सहारनपुर हाइवे स्थित पटाखा फैक्टरी में काम करने वाली महिलाएं गरीब परिवार से थीं। हादसे में मारी गई सरस्वती, निर्मला, नरेशो रायजादगान मोहल्ले की रहने वाली थी। तीनों परिवारों की आर्थिक हालत ठीक न होने से परिवार के पालन पोषण में मदद करने के लिए वे मजदूरी करने जाती थी। मोहल्ले में मातम पसरा है। कस्बे के लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने में लगे हैं।
एक माह बाद होनी है निर्मला की बेटी की शादी
हादसे का शिकार हुई निर्मला के पति श्याम लाल ने बताया कि फैक्टरी संचालक का पिता इंतजार मोहल्ले की महिलाओं को पैसे कमाने का लालच देकर मजदूरी कराने के लिए ले जाता था। श्यामलाल ने बताया कि उसके दो लड़की और दो लड़के हैं। वह बीमार रहता है, इसलिए पत्नी परिवार का पालन पोषण करने के लिए मजदूरी कर हाथ बंटाती थी। बड़ी बेटी सरिता का रिश्ता तय हो चुका है और करीब एक माह बाद शादी की तारीख तय थी। हादसे के कारण बेटी की शादी करने का सपना अधूरा रह गया। मां के खोने के बाद बच्चों का रो- रोकर बुरा हाल है।
पांच भाई-बहनों से छिन गया मां का प्यार
नरेशो का बड़ा बेटा राहुल 10वीं में पढ़ता है। राहुल ने बताया कि परिवार में उस सहित पांच बहन-भाई और पिता रह गए हैं। पिता रामफल का स्वास्थ्य ठीक न रहने से उसकी मां 200 रुपये रोजाना की मजदूरी पर फैक्टरी में जाती थी।
मेरे बच्चों की परवरिश कैसे होगी
हादसे का शिकार हुई सरस्वती के पति बालेन्द्र ने बताया कि उसके पांच बच्चे हैं। बड़ी लड़की की शादी हो चुकी है। तीन बेटे हैं। सरस्वती के जाने के बाद छोटे बच्चों की परवरिश कैसे होगी, यह समझ नहीं आ रहा है। बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्हें नहीं पता कि पटाखा फैक्टरी में हादसा कैसे हो गया। उन्होंने प्रशासन से इस हादसे की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।