नागरिकता संसोधन कानून (सीएए) के विरोध में हिंसा कराने के लिए पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने मेरठ सहित कई जिलों में फंडिंग की थी। परतें खुलने के बाद मेरठ पुलिस ने पीएफआई से जुड़े आठ लोगों को रिमांड पर लेने की तैयारी शुरू कर दी।
पुलिस ने बैंकों से भी संदिग्ध खातों की जानकारी मांगी है वहीं कई लोगों को चिन्हित कर उनके मोबाइल की सीडीआर निकालनी शुरू कर दी है। आगे देखें आखिर कैसे हिंसा के लिए बाहर से भी युवकों को बुलाया गया था: -
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Meerut Violence, bike
- फोटो : अमर उजाला
20 दिसंबर 2019 को देश भर में हिंसा कराने के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने लोगों को पहले से मानसिक रूप से तैयार किया था। पुलिस के मुताबिक मेरठ में 12 लोगों के अकाउंटों में पीएफआई ने पैसा डाला था, जिसमें से चार अकाउंटों में तीन करोड़ रुपये आने की बात कहीं गई। इसको लेकर पुलिस ने बैंकों को नोटिस भेजकर संदिग्ध अकाउंटों की जानकारी मांगी है।
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Meerut Violence
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मेरठ पुलिस ने पीएफआई से जुडे़ चार लोग मुईद, नूर हसन, जावेद और अमजद को जेल भेजा था। पुलिस जांच में चार और आरोपी अनस, अनीस उर्फ खलीफा, मौलाना राशिद और जुबैर का नाम सामने आया। इनको भी पुलिस जेल भेज चुकी है। अब पुलिस इन आठ आरोपियों को रिमांड पर लेने की तैयारी में जुट गई है। उनसे पूछताछ के बाद ही यह राज खुलेगा कि पैसा किस किस को दिया गया।
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मोबाइल की सीडीआर निकाली
पुलिस हिंसा में कई लोगों को चिंह्नित कर सकती है, इसकी जानकारी उनको थी। इसको लेकर कई जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार लोगों ने अपने फोन बंद कर लिये थे। पुलिस ने अब उन लोगों के मोबाइल की सीडीआर निकालनी शुरू कर दी।
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दिल्ली से आए थे 20 युवक
पुलिस की जांच में सामने आया कि हिंसा करने के लिये दिल्ली से 20 युवकों को लिसाड़ीगेट में भेजा गया था। पुलिस पर पथराव व गोलियां चलाकर उक्त युवक मेरठ से फरार हो गए थे।