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महाभारत सर्किट: ...जहां श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के छप्पन भोग छोड़, खाया था विुदर का भाव भरा साग

Wed, 11 Mar 2020 04:35 PM IST
कपिल kapil रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ
रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 11 Mar 2020 04:35 PM IST
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Mahabharata Circuit, Know what is the history of Vidur Kuti in Bijnor
विदुर कुटी फोटो: संजू - फोटो : अमर उजाला

सबसे ऊंची प्रेम सगाई, दुर्योधन की मेवा त्यागी साग विदुर घर पाई... सूर के इस पद को चरितार्थ करती है विदुर कुटी। जहां श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के छप्पन भोग छोड़ विुदर का भाव भरा साग खाया था। विदुर कुटी के बाहर खड़ा बथुआ का पेड़ उस स्मृति को जीवंत कर रहा है। यहां बारह महीने बथुआ उगता है। दूर दराज से आने वाले भक्त प्रसाद में यही लेकर जाते हैं। जब दुर्योधन ने श्रीकृष्ण के संधि प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, तब वह उसका आतिथ्य छोड़कर विदुर के घर आए और उन पर कृपा की।

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Mahabharata Circuit, Know what is the history of Vidur Kuti in Bijnor
विदुर कुटी - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर से 10 किमी दूर दारानगर गंज में विदुर कुटी है। महाभारत युद्ध के समय महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए विदुर आदि ने योजना बनाई। गंगा के किनारे पर इनके रहने के लिए स्थान नियत किया गया। महिलाओं के होने के कारण इसका नाम कालांतर में दारानगर यानी स्त्रियों का नगर पड़ गया। यहां कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है जिसमें असंख्य श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं।
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विदुर कुटी - फोटो : अमर उजाला
विदुर कुटी को बिड़ला मंदिर भी कहते हैं। वर्तमान में इस स्थान से गंगा करीब दो किमी दूर हो गई हैं। प्रांगण में विदुर जी की विशाल मूरत स्थापित है। इसका अनावरण पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने तीन नवंबर 1960 में किया था। इसके साथ यहां सुदर्शन चक्र धारी श्रीकृष्ण भी विराजमान हैं। धृतराष्ट्र-संजय, कौरवों की सभा में द्रौपदी का चीरहरण, अर्जुन को उपदेश देते श्रीकृष्ण आदि प्रसंगों को यहां दर्शाया गया है।
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विदुर कुटी - फोटो : अमर उजाला
विदुर कुटी के पुजारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि विदुर जी महाभारत युद्ध को रोकना चाहते थे। उन्होंने धृतराष्ट्र से पांडवों को आधा राज्य देने को कहा। धृतराष्ट्र द्वारा अपमान किए जाने पर विदुर यहां चले आए। इस स्थान पर उन्होंने तपस्या की। जब संधि प्रस्ताव लेकर श्रीकृष्ण हस्तिनापुर गए, तब यहां आए। कहीं कहीं श्रीकृष्ण द्वारा केले के छिलके खाने का जिक्र भी आया है। सूर के पद में साग का उल्लेख है। यहां बारह मास बथुआ होता है। दूर-दूर से भक्त विदुर कुटी में आते हैं। बिड़ला द्वारा ही इस मंदिर का निर्माण कराया गया जो 1978 में पूरा हुआ। यहां कार्तिक पूर्णिमा में गंगा स्नान और सावन में छड़ी का मेला लगता है।
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विदुर कुटी - फोटो : अमर उजाला
पांडवों की आस्था से जुड़ा देवी मंदिर
बिजनौर में कई क्षेत्र हैं जिन्हें महाभारत काल से जोड़ा जाता है। चांदपुर का देवी मंदिर पांडवों की आस्था से जुड़ा है। यहां बरगद का प्राचीन वृक्ष है। मठ में काली माता विराजमान हैं। उनके सामने दुर्गा मां की स्मित मूरत है। मान्यता है कि पांडव यहां देवी की पूजा-अर्चना के लिए आते थे। विदुर कुटी से करीब 25 किमी दूर सेंधवार सैन्यद्वार का अपभ्रंश है। कहते हैं कि महाभारत काल में यहां सेना रहती थी।

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