16 जुलाई की मध्यरात्रि होने वाले चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग 149 साल बाद बन रहा है। क्योंकि, गुरु पूर्णिमा के साथ-साथ ही इस बार चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। इसके फलदायी और हानिकारक परिणाम भी होंगे। ग्रहण के समय पूजा-अर्चना करना और दान करना उत्तम होगा -
चंद्र ग्रहण: 149 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, राशियों पर पड़ेगा ये प्रभाव, इस जाप से दूर होंगे कष्ट
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भारत में दिखाई देने वाला चंद्र ग्रहण 16 जुलाई की मध्य रात्रि को आरंभ होगा, जो इस वर्ष का सबसे बड़ा ग्रहण कहलाएगा। भारतीय समय अनुसार चंद्र ग्रहण रात्रि 1:31 बजे से आरंभ होगा और सुबह 4:30 बजे तक रहेगा। ग्रहण का कुल समय दो घंटे 59 मिनट को होगा। सहारनपुर के आचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग 149 वर्ष बाद बना है।
ग्रहण का सूतक शाम 4:31 बजे से आरंभ हो जाएगा। इसके बाद चंद्र मालिन्यकाल रात्रि 12:12 बजे शुरू होगा। चंद्र निर्मलता काल प्रात: 5:59 बजे शुरू होगा। इस ग्रहण का प्रभाव फलदायी और हानिकारक दोनों तरह का रहेगा। इसलिए ग्रहण के समय मंत्रों का जाप करना और अन्न का दान करना मनुष्य के लिए लाभदायक होगा। ताकि जीवन पर चंद्र ग्रहण का दुष्प्रभाव न पड़े।
जाप और दान करने से कष्ट होंगे दूर
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के प्रथम चरण में स्पर्श करके उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण में समाप्त होगा। इसलिए धनु एवं मकर राशि में उत्पन्न जातकों को विशेष रूप से चंद्र-राहु का जाप करना चाहिए।
धनु राशि के स्वामी गुरु एवं मकर राशि के स्वामी शनि का जप एवं दान करना कल्याणकारी रहेगा। जिन जातकों को यह ग्रहण अशुभ फल देने वाला है, उन्हें अपनी राशि के अनुसार वस्तुओं का दान एवं ग्रहण काल में अपनी राशि के स्वामी का मंत्र जप करना चाहिए।
ऐसा करने से होगा नुकसान
ज्योतिषचार्यों के मुताबिक ग्रहण काल में देवी-देवताओं की मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही अनावश्यक खानपान, सोना, नाखून -बाल काटना, हजामत बनाना, तेल मालिश करना, मल-मूत्र त्यागना, अनावश्यक घूमना नुकसान दायक साबित होगा। छोटे बालक, रोगी एवं वृद्ध व्यक्ति आवश्यकतानुसार जल औषधि का सेवन कर सकते हैं।