देश के विभिन्न राज्यों से लौट रहे दिहाड़ी मजदूरों को पलायन जारी है। हालांकि अब इसे रोकने के लिए प्रशासन ने शेल्टर व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। सहारनपुर मुजफरनगर मेरठ में प्रशासन ने बंद पड़े काॅलेज और स्कूलों को क्वारंटीन केंद्र बनाया है। जहां इन मजदूरों के ठहरने की व्यवस्था है:-
शामली में बाॅर्डर पर सख्ती बढ़ाने के साथ ही बिना वजह निकले लोगों का पुलिस ने चालान कर दिया। वहीं सहारनपुर में अंबाला हाईवे पर एक डेरे में दूर दराज से आए मजदूरों ने शरण ली। हालांकि डेरे में यात्रियों की निगरानी की जा रही है। मेडिकल टीम मौके पर मौजूद है। डेरे में ठहरे हुए सभी मजदूरों की स्क्रीनिंग की जा रही है।
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लॉकडाउन मेरठ
- फोटो : amar ujala meerut
देहरादून से मुजफरनगर पहुंचे बस्ती के निवासी पन्नेलााल,विजय और सुभाष ने बताया कि वे सभी वहां वाॅल पेंटिंग का कार्य करते हैं। लाॅकडाउन के दौरान काम बंद होने के बाद पैदल ही अपने घरों को पहुंचे हैं।
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जिले के महावीर चैक पर बंद पड़ी दुकानों के बाहर आराम करते सीतापुर के श्रमिक ने बताया कि वे देहरादून से आए हैं। वहां टेलिकाॅम कंपनियों में भूमिगत केबल बिछाने का काम करते हैं।
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प्रशासन ने मीरापुर के बीआईटी इंस्टीट्यूट को क्वारंटीन सेंटर बनाया है। यहां वर्तमान में 83 लोग भर्ती हैं। स्वास्थ्य जांच से लेकर खाने पीने की व्यवस्था तक पुलिस ने कड़े इंतजाम किए हैं। सोमवार को डीएम और एसएसपी ने केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
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बुढ़ाना में मेरठ करनाल हाईवे पर पैदल और रेहड़ी पर परिजनों के साथ पानीपत से लौट रहे बदायूं के परिवार जिन्हें अपने गांव सलेमपुर जाना है। यह परिवार चलते चलते थक चुका था लेकिन उनका कहना था कि साधन नहीं मिला तो पैदल ही घर जाएंगे।