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Kargil Vijay Diwas: मेरठ के पांच बेटों ने कारगिल में जान की बाजी लगाकर चुकाया वतन की मिट्टी का कर्ज

Tue, 26 Jul 2022 11:21 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 26 Jul 2022 11:21 AM IST
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Kargil Vijay Diwas: Five jawans of Meerut paid debt of the soil of their country by putting their lives in K
kargil vijaydivas - फोटो : अमर उजाला

कारगिल युद्ध की जब भी बात होती है तो मेरठ के पांच सपूतों के बलिदान की कहानियां हर देशवासी के सीने को गर्व से चौड़ा कर देती हैं। जिले के पांच वीर सपूतों की कारगिल युद्ध के दौरान दिखाई बहादुरी और जांबांजी के किस्से उनके देश के प्रति सच्ची श्रद्धा और बलिदान को बयां करती हैं। हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हुए इन जांबाजों को नमन किया जाता है।



21 साल पहले कारगिल की लड़ाई में इन जांबाजों को खोने वाले परिवारों के सदस्यों की बेटों की याद में आज भी आंखें नम हो जाती हैं लेकिन साथ ही उनका सीना अब भी गर्व से चौड़ा हो जाता है कि उनके बच्चों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। इन वीरों सहित अन्य जवानों की शहादत से ही कारगिल में फतह मिली और वहां फिर से तिरंगा लहराया। इन शहीदों के परिवारों का ऋण ये देश कभी नहीं चुका पाएगा। आइए कारगिल दिवस पर इन शहीदों को नमन करें।

Kargil Vijay Diwas: Five jawans of Meerut paid debt of the soil of their country by putting their lives in K
शहीद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

जब योगेंद्र शहीद हुए थे, उनकी बेटी आठ साल की थी
कारगिल युद्ध में टाइगर हिल पर पाकिस्तानी सेना ने सबसे ज्यादा नुकसान किया। दुश्मन 18 हजार फीट की ऊंचाई पर और हमारे जवान नीचे। वे पत्थर भी फेंकते तो गोली की तरह लगता। उधर से मशीनगन चल रही थी। कितने ही अफसर-जवान शहीद हो गए थे। योगेंद्र यादव की बटालियन को टास्क दिया गया। ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव ने अपने सात साथियों के साथ प्वाइंट पर पहुंचकर पाकिस्तानी बंकरों को ध्वस्त किया।

उन्होंने दुश्मन के 17 जवानों को मौत के घाट उतार दिया। पांच जुलाई 1999 की शाम को दुश्मन की जवाबी गोलीबारी में वो शहीद हो गए। उनकी वीरता के लिए वीर चक्र मेडल दिया गया। उनकी पत्नी वीर नारी उर्मिला देवी बताती हैं, उनकी शहादत के समय बड़ी बेटी ज्योति महज आठ साल की थी। बेटा संदीप सात और दीपक चार साल का था। बेटे संदीप और दीपक बताते हैं कि पिता की बहादुरी पर उन्हें फख्र होता है।

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तिरंगा फहराकर शहीद हुए मेजर मनोज तलवार - फोटो : Amar Ujala Meerut

तिरंगा फहराकर शहीद हुए मेजर मनोज तलवार
मवाना रोड स्थित डिफेंस कालोनी ए-34 निवासी मेजर मनोज तलवार की फरवरी 1999 में फिरोजपुर पंजाब में तैनाती हुई। लेकिन वे देश के लिए कुछ करना चाहते थे, उन्होंने सियाचिन में नियुक्ति की मांग कर दी। कारगिल में युद्ध हुआ तो उनकी बटालियन को टुरटुक में भेजा गया।

13 जून को उन्होंने कारगिल सेक्टर टुरटुक में तिरंगा फहरा दिया। इसी बीच दुश्मन की तोप के गोले के वार से वह शहीद हो गए। उनके पिता रिटायर्ड कैप्टन पीएस तलवार का कुछ दिन पहले ही निधन हो चुका है। मां ऊषा तलवार का निधन कई वर्ष पहले हो गया था। परिवार में छोटे भाई और बहनें हैं। 

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फतह के बाद शहीद हुए सत्यपाल सिंह - फोटो : Amar Ujala Meerut

फतह के बाद शहीद हुए सत्यपाल सिंह
मूलरूप से गढ़मुक्तेश्वर के लुहारी गांव निवासी लांसनायक सत्यपाल सिंह का जनवरी 1999 में जम्मू तबादला हुआ था। इसी बीच कारगिल की जंग शुरू हो गई। उनकी बटालियन सेकेंड राजपूताना राइफल्स को कारगिल पहुंचने का आदेश मिला।

तोलोलिंग जीतने के बाद 28 जून को दुश्मनों से लड़ते हुए वो द्रास सेक्टर में शहीद हो गए। बड़ा बेटा पुलकित साढ़े तीन साल और बेटी दिव्या ढाई साल की थी।  

 

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जुबैर ने ली थी दुश्मनों से टक्कर - फोटो : Amar Ujala Meerut

जुबैर ने ली थी दुश्मनों से टक्कर
मूलरूप से ललियाना एवं वर्तमान में जैदी फार्म निवासी वीर नारी इमराना बताती हैं कि जुबैर अहमद की 22 ग्रेनेडियर हैदराबाद से जम्मू में तैनाती हुई थी। इसी बीच लड़ाई शुरू हो गई। वह पत्नी इमराना और परिवार को दिलासा देकर चले गए।

तीन जुलाई 1999 को हिंद पहाड़ी पर लड़ते-लड़ते वह शहीद हो गए। आज उनकी बड़ी बेटी सना परवीन पोस्ट ग्रेजुएशन कर चुकी हैं। छोटी बेटी निशा परवीन ग्रेजुएट हैं। बेटा खालिद जुबैर अपना काम कर रहा है।   
 

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