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पुलिस कमिश्नर प्रणाली: चीन की सीमा तक थी आईजी की हुकूमत, वक्त के साथ ऐसे बदली खाक़ी की सूरत

Tue, 14 Jan 2020 05:33 PM IST
Dimple Sirohi गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 14 Jan 2020 05:33 PM IST
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IG Meerut wireless used to resonated to China border, here is how police system changed
नए कमिश्नर आलोक सिंह - फोटो : अमर उजाला

लंबी कवायद के बाद यूपी पुलिस में भी कमिश्नर सिस्टम लागू हो गया है। शुरुआती दौर में इसे नोएडा और लखनऊ में लागू किया गया है।



इस नई व्यवस्था से मेरठ रेंज और जोन में फिर से बड़ा बदलाव सामने आएगा, क्योंकि आईजी मेरठ जोन का वायरलेस सेट कभी चीन की सीमा तक गूंजता था। भारत के आखिरी छोर यानी गढ़वाल तक आईजी मेरठ का अधिकार क्षेत्र हुआ करता था। आगे देखें कैसे तेजी से बदली पुलिस व्यवस्था: -


 
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नए कमिश्नर आलोक सिंह - फोटो : अमर उजाला

1990 के दशक में मेरठ पुलिस का कार्यक्षेत्र दूरदराज तक रहता था। मेरठ जोन के आईजी का राज दिल्ली बॉर्डर से लेकर चीन की सीमा के पास तक चलता था।

अब का उत्तराखंड उस समय उत्तर प्रदेश में ही हुआ करता था और गढ़वाल मंडल व सहारनपुर मंडल मेरठ का ही हिस्सा हुआ करते थे। गाजियाबाद, बागपत सिर्फ तहसील हुआ करती थीं। ये पूरा क्षेत्र मेरठ आईजी के अधिकार क्षेत्र में आता था।

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मेरठ पुलिस - फोटो : अमर उजाला

14 नवंबर 1976 में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मेरठ का एक हिस्सा काटकर गाजियाबाद जिला बना दिया था। 1997 में मेरठ के हिस्से से बागपत जिला बना।
 

9 जून 1997 को नोएडा जिला बना, जिसको लेकर काफी जद्दोजहद हुई। बाद में इसका नाम गौतम बुद्ध नगर रखा गया। बड़ा क्षेत्रफल और आबादी को देख वर्ष 2000 में उत्तराखंड बना और यूपी दो हिस्से में बांट दिया गया।

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मेरठ पुलिस - फोटो : अमर उजाला

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 28 सितंबर 2011 को हापुड़ को पंचशील नगर का नाम दिया था। बाद में सपा सरकार ने इसका नाम फिर से हापुड़ कर दिया था। इस तरह मेरठ जनपद की सीमा बहुत छोटी होती गई।
 

लेकिन कमिश्नरी होने के कारण हापुड़, गाजियाबाद, नोएडा, बागपत जनपद कमिश्नर और आईजी के अधिकार क्षेत्र में बने रहे। जबकि सहारनपुर कमिश्नरी में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली शुमार हो गए। 

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मेरठ पुलिस - फोटो : अमर उजाला

बागपत, गाजियाबाद, हापुड़ व नोएडा जिला मेरठ का हिस्सा होने के चलते पुलिसिंग में बदलाव किया गया। बसपा शासन में 24 फरवरी 2011 से 15 मई 2011 तक आईपीएस गुरुवचन लाल को एडीजी मेरठ एनसीआर बनाया गया। इसके बाद आईपीएस केएल मीणा 25 मई 2011 को बनाए गए। फिर आईपीएस जवाहरलाल त्रिपाठी को 24 मार्च 2012 में एडीजी एनसीआर मेरठ जोन बनाया गया।
 

उसके बाद 15 नवंबर 2012 को एनसीआर जोन के बजाय मेरठ जोन बनाया गया। फिर रेंज आईजी और महानगर में एसएसपी/डीआईजी बैठने लगे। सपा सरकार में आईजी जोन का पद रहा। रेंज में डीआईजी और जिले में एसएसपी का पद रहा। यह प्रक्रिया दो साल चली और फिर एडीजी जोन व्यवस्था बहाल कर दी गई।

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