मेरठ जनपद में हस्तिनापुर क्षेत्र के पलड़ा गांव में विशु हत्याकांड के बाद हुआ बवाल पुलिस की लापरवाही का नतीजा रहा। जिस तरीके से रविवार शाम भीड़ आक्रोशित थी और रात 12 बजे तक जाम भी लगाए रखा, उससे भीड़ के गुस्से का साफ पता चल रहा था। यहां तक भी जाम के दौरान कुछ लोगों ने धमकी भी दी थी कि इस हत्याकांड का बदला लेकर रहेंगे। इसके बावजूद सोमवार सुबह पुलिस ने मामले की गंभीरता को नहीं समझा।
PHOTOS: बेबस पुलिस, बेखौफ भीड़... आंखों के सामने धधकती रही आग, हत्या के विरोध में जमकर हुआ बवाल
वहीं जितनी फोर्स बवाल के बाद लगाई गई, यदि समय रहते लगा दी गई होती तो शायद यह हिंसक घटना नहीं होती। उधर, मामला दो समुदाय से जुड़ा होने के कारण बवाल की गूंज लखनऊ तक भी पहुंच गई। वहां आला अधिकारियों को पल-पल की रिपोर्ट भेजी गई।
कई घंटे जंगलों में छिपे रहे महिलाएं और बच्चे
जिस समय पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ शुरू हुई तो दूसरे समुदाय के लोग वहां से भाग निकले। यहां तक कि महिलाएं और बच्चे भी कई घंटों तक खेतों में छिपे रहे और कुछ अपने रिश्तेदारों के यहां पर चले गए। दहशत का आलम यह था कि हर तरफ चीख-पुकार मची थी। वहीं, आक्रोशित भीड़ पर वह कुछ भी कर गुजरने पर आमादा थी। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।
आग लगी तो खूंटा उखाड़कर भागी भैंस
भीड़ ने नवाबुद्दीन के मकान के बाहर छप्पर में भी आग लगा दी थी। नवाबुद्दीन परिवार के साथ वहां से भागा, लेकिन भैंस छप्पर के अंदर बंधी रह गई। आग की लपटें लगने पर भैंस ने भी खूंटा उखाड़ दिया और वहां से भागी। वहीं आक्रोशित भीड़ ने धार्मिक स्थल पर लगे सबमर्सिबल, टंकी, दरवाजे के शीशे, पानी के टैंक और अन्य सामान में तोड़फोड़ कर दी।
भीड़ में शामिल थे बाहरी लोग
ग्रामीणों का कहना है कि भीड़ में शामिल कुछ लोग गांव के रहने वाले थे, जबकि अधिकतर बाहरी थे। वह अंतिम संस्कार में आए थे या उन्होंने पहले से ही बवाल की तैयारी कर ली थी, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस बवाल करने वाले लोगों की पहचान कर रही है। कुछ लोगों की पहचान हो चुकी है।