महाभारतकालीन एतिहासिक नगरी में प्राचीन अवशेष आज भी मौजूद हैं। यहां खुदाई के समय पांडवों के किले के अवशेष मिलते हैं। यहां स्थित द्रोपदी घाट पर प्रतिवर्ष सत्ता फेरी का मेला लगता है। इसमें देश के कई राज्यों से महिलाएं आती हैं। मान्यता है कि घाट पर स्नान करने से कुष्ठ रोग दूर हो जाते हैं।
हस्तिनापुर गाथा: द्रोपदी घाट पर स्नान करने से मिलता है रोगों से छुटकारा, तस्वीरें
कस्बे से करीब ढाई किमी की दूरी पर प्राचीन बूढ़ी गंगा के किनारे पर द्रोपदी घाट स्थित है। मान्यता के चलते सैकड़ों महिला श्रद्धालु यहां पर प्रतिदिन आकर स्नान करती हैं। द्रोपदी मंदिर की महंत बेगवती के अनुसार मान्यता है कि इस स्थान पर महाभारतकाल में माता द्रोपदी इसी स्थान पर स्नान करती थीं।
द्रोपदी पूजा के लिए इसी स्थान पर आती थीं। यहां हजारों साल पुराना पीपल का वृक्ष आज भी मौजूद है। इस स्थान की मान्यता है कि जो भी महिलाएं इस स्थान पर श्रद्धा और विश्वास के साथ स्नान करती हैं उन्हें शारीरिक बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है। घर में खुशहाली आती है।
प्रतिवर्ष यहां महिलाओं का सत्ता फेरी का बड़ा मेला लगता है। इसमें दूर-दराज से हजारों महिलाएं आकर द्रोपदी मंदिर में पूजा अर्चना करती हैं। बेगवती के अनुसार जैसे-जैसे समय बदला वैसे-वैसे इस पौराणिक स्थान की दिशा और दशा भी बदल गई।
सुविधाओं का अभाव
द्रोपदी मंदिर तक पहुंचने के लिए न तो पक्की सड़क की व्यवस्था है और न ही सड़क किनारे लाइटों की। इस कारण श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। श्रद्धालु मंदिर तक जैसे-तैसे पहुंचते हैं। साथ ही पेयजल की भी उचित व्यवस्था का अभाव है। पर्यटन विभाग के अधिकारी भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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