मेरठ से सटे माछरा के जिला अस्पताल में गुरवार सुबह एक अद्भुत बच्ची ने जन्म लिया। शिशु के जन्म के तुरंत बाद उसके स्वरूप को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया लेकिन परिजन मां और बच्ची को घर ले गए।
मेरठ में ग्रहण के दिन विचित्र बच्ची ने लिया जन्म, देखने को उमड़ी भीड़, लोग मान रहे दैवीय चमत्कार
माछरा सीएचसी में गांव कासमपुर स्वामीपुरा निवासी महिला ने बीती रात करीब डेढ़ बजे एक बच्ची को जन्म दिया। उसे देख चिकित्सकों ने मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया परंतु परिजन घर ले गए। वहां ग्रामीण उसे देवी का रूप बताकर चढ़ावा चढ़ा रहे हैं।
कासमपुर स्वामीपुरा निवासी सरदार गोविंद पुत्र करन सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी जयकौर को बुधवार रात प्रसव पीड़ा के चलते सीएचसी माछरा में भर्ती कराया था। वहां जयकौर ने बच्ची को जन्म दिया। उसे देख चिकित्सक एवं नर्स हैरत में पड़ गए।
बच्ची के चेहरे पर आंख एवं नाक के महज निशान भर हैं। बच्ची की त्वचा भी जगह-जगह फटी हुई है। उसके हाथों एवं पांवों की उंगली भी नहीं हैं। इसलिए चिकित्सकों ने जच्चा एवं बच्ची को मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया।
गांव माछरा, नंगली अब्दुल्ला, गोविंदपुरी, नंगली किठौर समेत कई गांवों से महिला एवं पुरुष गोविंद से पहुंचे। उसे देवी का रूप मानते हुए चढ़ावा चढ़ाना शुरू कर दिया। सरदार गोविंद ने बताया कि उसे पहले से ही एक पुत्र एवं एक पुत्री है।
दरअसल, यह बच्ची हार्लेक्विन इक्थ्योसिस डिसऑर्डर का शिकार होने के कारण ऐसी जन्मी है। विशेषज्ञों की मानें तो यह त्वचा से संबंधित एक रेअर जेनेटिक डिसऑर्डर है।
हर्लेक्विन इचथ्योसिस से पीड़ित बच्चों के शरीर पर सामान्य त्वचा की जगह सूखी, पपड़ीदार 'मछली' की तरह त्वचा होती है। तीन लाख बच्चों में से कोई एक शिशु इस डिसऑर्डर का शिकार होता है।
इस रेअर कंडीशन में जन्में शिशुओं के शरीर पर अधिकांश भाग में बहुत सख्त, मोटी त्वचा होती है। जो गहरी दरारों के साथ बड़े बड़े टुकड़ों में टूटने लगती है।
चेहरे की विशेषताओं में मुंह, आंखें और कान भी विकृत होते हैं जो उन्हें एक भयावह रूप देते हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत में अब तक केवल तीन मामले दर्ज किए गए हैं और वे सभी जन्म के तुरंत बाद ही मर गए हैं।