दोस्त वो जो जीवन के हर मुश्किल सफर पर साथ दे। जब सारी दुनिया हमसे मुंह मोड़ ले तब सच्चे दोस्त और उसकी दोस्ती की पहचान होती है। यूं तो दोस्ती के बड़े-बड़े दावे तमाम लोग करते हैं, लेकिन जो मुकाम तक पहुंचकर दोस्ती निभाएं ऐसे लोग कम ही मिलते हैं। जिनकी दोस्ती समाज और लोगों के लिए मिसाल बन जाती है। हर वर्ष अगस्त के पहले रविवार को फ्रैंडशिप डे मनाया जाता है। आज फ्रैंडशिप डे पर दोस्तों के इस दिन पर हम लाएं शहर के कुछ ऐसे ही लोगों की दोस्ती के किस्से जिन्होंने लंबे समय से एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। इन दोस्तों की दोस्ती परिवार, समाज के लिए एक मिसाल कायम करती है।
फ्रैंडशिप डे: दोस्ती के पांच ऐसे किस्से... जिन्हें पढ़ आ जाएगी सच्चे दोस्त की याद, तस्वीरें
24 सालों से हैं एक साथ
सम्राट पैलेस कॉलोनी निवासी ज्योति जोसफ और स्वाति सचदेवा 24 सालों से साथ हैं। स्वाति एक निजी विद्यालय में शिक्षिका हैं। स्वाति ने बताया कि हमारी दोस्ती सेंट थॉमस स्कूल में नर्सरी कक्षा में पढ़ाई के वक्त हुई। कॉलेज, स्कूल के बाद जॉब तक का सफर हमने साथ तय किया। हर वीकेंड पर मिलते जरूर हैं और बात तो रोजाना होती ही है। हालांकि लोगों ने कई बार हमारे बीच गलतफहमी लाने की कोशिश की, लेकिन हमारी आपसी सूझबूझ ने हमारी दोस्ती के रिश्ते को टूटने नहीं दिया।
साथ तय किया है सफर
वैशाली कॉलोनी निवासी श्रेष्ठा और अंबिका बचपन से ही साथ हैं। 12वीं तक साथ पढ़ाई की विषय भी दोनों ने एक साथ कॉमर्स लिया। श्रेष्ठा ने बताया कि स्कूल के बाद जब कॉलेज में एडमिशन की बात आई तो हमें लगा कि अब हमें अलग होना पड़ेगा। क्योंकि मेरा सपना डीयू से पढ़ने का था। डीयू में एक साथ एक कॉलेज मिलना मुश्किल था। हमें पिछले साल एक साथ एलएसआर में प्रवेश मिला। हमने हॉस्टल और रूम भी एक लिया। कई बार लोग हमें बहनें बोलते हैं।
स्कूल से खेल के मैदान तक साथ
दोस्ती हो तो इशान और कार्तिक जैसी। गढ़ रोड निवासी इशान और कार्तिक दोनों के परिवार इन दोस्तों के लिए यही कहते हैं। बॉलीवाल के स्टेट चैंपियन रह चुके इशान और कार्तिक की दोस्ती केवल स्कूल में ही साथ नहीं है, बल्कि खेल क ा मैदान भी दोनों की दोस्ती को सलाम करता है। इशान कहते हैं मुझे भरोसा नहीं हुआ जब बॉलीवाल की स्टेट चैम्पियनशिप में हम दोनों का नाम एक साथ आया और हमने जीत दर्ज की। तब मुझे लगा कि वाकई सच्ची दोस्ती में ताकत होती है।
दोस्ती में बदली मुलाकात
गढ़ रोड निवासी रमा सचदेवा और रीना यादव बचपन की सहेली नहीं हैं। एक बार दोनों की मुलाकात किसी आयोजन में हुई। दोनों अपने परिवार के साथ आयोजन में पहुंची। बैठे-बैठे बोरियत हो रही थी तो सोचा आपस में बात कर लें। रीना और रमा की बातों का सिलसिला कुछ यूं चला कि उनकी बातों की डोर दोस्ती में बदल गई। आज 15 सालों से रीना और रमा ही नहीं उनका परिवार अच्छा दोस्त है। दोनों साथ घूमती हैं, शॉपिंग जाती हैं। बच्चों और परिवार के मसलों पर एक दूसरे से सलाह लेती हैं।