नकली फूड सप्लीमेंट और स्टेरॉयड की अधिकता ने मेरठ में जिम ट्रेनर की जान ले ली। मृतक संजीव धामा के हंसते-खेलते परिवार की खुशियां भी मातम में बदल गईं। संजीव पेट में दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल में भर्ती हुए थे। यहां 27 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़े, आखिर में उनकी मौत हो गई। संजीव की मौत से पत्नी, दो बेटियों और बुजुर्ग माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। इलाज करने वाले चिकित्सकों ने आशंका जताई है कि नकली फूड सप्लीमेंट और स्टेरॉयड की मात्रा अधिक लेने से ही ऐसा हुआ है।
Gym Trainer Death: संजीव धामा की मौत के बाद कमरे से मिली ऐसी चीज, पत्नी बोली-पता होता तो रोक लेती
संजीव धामा की मौत के मामले में पत्नी आराधना का कहना है कि अभी तक वह नहीं जानती थीं कि उनके पति अधिक मात्रा में फूड सप्लीमेंट और स्टेरॉयड लेते हैं। इसका अंदाजा तो उन्हें तब हुआ जब उनके कमरे से सप्लीमेंट की कई खालीं बाल्टियां मिलीं।
वह कहती हैं कि उनके पति तो अब नहीं रहे, लेकिन वह नहीं चाहती कि युवाओं की सेहत से आगे ऐसा खिलवाड़ हो। इसलिए उनकी कोशिश है कि अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ मुहिम शुरू करने की मांग की है। इसके लिए डीएम, एसएसपी और अन्य अफसरों से मदद भी लेंगी।
आराधना के मुताबिक जिस जिम में संजीव ने रिसेप्शनिस्ट की नौकरी की थी, उसी में वह जिम ट्रेनर बन गए थे। वह बॉडी बिल्डर की दुनिया में बड़ा नाम कमाना चाहते थे। इस कारण उन्होंने खुद को तैयार करना शुरू कर दिया था। संजीव धामा ने मुंबई से लौटकर यहां जिम ट्रेनर के रूप में काम शुरू किया था। उनका कद अच्छा था। शुरुआत में वह बिना प्रोटीन और सप्लीमेंट के ही जिम ज्वाइन करते थे, लेकिन धीरे-धीरे फूड सप्लीमेंट लेना शुरू कर दिया था।
किसी ने पोस्टमार्टम के लिए नहीं बोला
आराधना ने बताया कि एम्स में संजीव की मौत के कुछ देर बाद ही उन्हें शव सौंप दिया गया। वह शव मेरठ लेकर आ गए। उन्हें किसी ने पोस्टमार्टम कराने के लिए नहीं कहा। अब उनके पास सभी अस्पताल की केस हिस्ट्री है। वह इसे संभालकर रखेंगी। यदि प्रशासन स्तर पर जांच होगी तो वह यह दस्तावेज सौंप देंगी।