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गुरुनानक देव की जयंती: ताजा हुई यादें, पाकिस्तान पर जीत के बाद हुई थी इस गुरुद्वारे की स्थापना

Fri, 08 Nov 2019 03:49 PM IST
कपिल kapil आशुतोष भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
आशुतोष भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 08 Nov 2019 03:49 PM IST
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Guru Nanak Jayanti, Sheeshe wala gurudwara was established in Meerut after winning war from Pakistan
गुरुद्वारा - फोटो : अमर उजाला

गुरुनानक देव जी की 550वीं जयंती की तैयारियां मेरठ शहर में जोर शोर से चल रही है। शहर के सभी 22 गुरुद्वारे अपने आप में खास हैं। गुरुद्वारों की स्थापना के पीछे संगत का बरसों का संघर्ष और परिश्रम छिपा है। ज्यादातर सभी गुरुद्वारों की स्थापना वर्ष 1947 यानि आजादी के बाद ही हुई है। शहर की 25 हजार सिख संगत प्रतिदिन गुरुद्वारे में गुरुग्रंथ साहिब के सामने शीश झुकाती हैं। गुरुनानक देव जी जयंती कार्तिक मास की पूर्णिमा यानि 12 नवंबर को उत्साह के साथ मनाई जाएगी। गुरुनानक देव जी का जन्म भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाएगा। सिख समाज के लिए गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व से बड़ा कोई पर्व नहीं है।

गुरुद्वारों से कोई नहीं जाता भूखा

Guru Nanak Jayanti, Sheeshe wala gurudwara was established in Meerut after winning war from Pakistan
थापर नगर स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा - फोटो : अमर उजाला

शहर के गुरुद्वारा थापरनगर, लेखानगर, लालकुर्ती, लेखनगर और दशमेश नगर आदि सभी गुरुद्वारों में प्रतिदिन लंगर लगाया जाता है। प्रतिदिन जरूरतमंद लोग यहां प्रसाद ग्रहण करते हैं। शहर के गुरुद्वारों में प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में सजावट और लंगर तक की खास तैयारियां की गई हैं। इस दौरान गुरुद्वारों में विशाल कीर्तन दरबार सजाए जाएंगे।

ये हैं शहर के प्रमुख गुरुद्वारे

Guru Nanak Jayanti, Sheeshe wala gurudwara was established in Meerut after winning war from Pakistan
गुरुद्वारा - फोटो : अमर उजाला

गुरुद्वारा कीर्तनगढ़ साहिब लेखानगर, गुरुद्वारा श्रीगुरु सिंह सभा थापरनगर, गुरुद्वारा सत्संग सदर, गुरुद्वारा कलगीघर लालकुर्ती, गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर श्रद्धापुरी, गुरुद्वारा श्रीगुरु सिंह सभा कंकरखेड़ा, गुरुद्वारा सत्संग कंकरखेड़ा, गुरुद्वारा गुरुनानक सभा थापरनगर, गुरुद्वारा भाई जोगा सिंह देवपुरी, गुरुद्वारा दशमेश दरबार दशमेश नगर, गुरुद्वारा सचखंड साहिब गुरुनानक नगर, गुरुद्वारा कलगिघर पूर्वा महावीर, गुरुद्वारा श्रीगुरु रामदास जी सूर्या पैलेस, गुरुद्वारा माता सीता भैसाली ग्राउंड, गुरुद्वारा गुरुनानक सभा प्रह्लादनगर, गुरुद्वारा गुरू तेग बहादुर नई सड़क शास्त्रीनगर, गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार कालंदी टीपीनगर, गुरुद्वारा गुरुनानक दरबार कोटला शहर घंटाघर, गुरुद्वारा 510 कंकरखेड़ा आदि भी शहर के प्रमुख गुरुद्वारों में शामिल हैं।

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शीशे वाले गुरुद्वारे की खास पहचान

Guru Nanak Jayanti, Sheeshe wala gurudwara was established in Meerut after winning war from Pakistan
पाकिस्तान पर जीत के बाद हुई इस गुरुद्वारा की स्थापना - फोटो : अमर उजाला

पाकिस्तान पर जीत की निशानी के रूप में तैयार शीशे वाले गुरुद्वारे की देशभर में पहचान है। पंजाब रेजीमेंट 1929 से 1976 के मध्य मेरठ में रही। पाकिस्तान से युद्ध में जीत के बाद 1972 में इस गुरुद्वारे की स्थापना की गई थी। आर्किटेक्चर की दृष्टि से यह गुरुद्वारा शिल्पकारी की बड़ी मिसाल है। गोलाकार बने इस गुरुद्वारे के चारों तरफ शीशे लगे हैं। शहीद बाबा दीप सिंह जी के नाम पर बने इस गुरुद्वारे में तीन निशान साहिब लगे हुए हैं। छावनी क्षेत्र में होने के कारण यहां का शांत माहौल और हरियाली सभी को अपनी तरफ आकर्षित करती है।

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पंज प्यारे भाई धर्म सिंह गुरुद्वारा, सैफपुर

Guru Nanak Jayanti, Sheeshe wala gurudwara was established in Meerut after winning war from Pakistan
गुरुद्वारा - फोटो : अमर उजाला

सैफपुर करमचंदपुर गांव के भाई धरम सिंह जी गुरु गोविंद सिंह जी की एक आवाज पर आगे बढ़े और एक भरी सभा में त्याग और बलिदान का साहस दिखाकर उनके प्यारे बन गए। भाई धरम सिंह जी की तरह ही एक-एक कर पांच अनुयायी साथ आए और फिर यहीं पंज प्यारे कहलाए। सैफपुर करमचंदपुर में जो गुरुद्वारा है वह कभी भाई धरम सिंह जी का पुश्तैनी घर हुआ करता था। भाई धरम सिंह जी मूलत: जाट समुदाय के थे। उनका नाम धरम दास था। वह भाई संतराम और माई साबो के पुत्र थे, जिनका जन्म सैफपुर करमचंद, हस्तिनापुर में 1666 में हुआ था। उन्होंने सिक्ख धर्म को उस समय से पेश किया, जब वह मात्र 13 वर्ष के थे। वे गुरु गोविंद सिंह के पंच प्यारे बनकर सामने आए और खालसा पंथ की स्थापना संभव हुई। 42 साल की उम्र में 1708 में उनका देहावसान गुरुद्वारा नानकदेव साहिब में हो गया था।

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