पौष माह की इस सर्दी ने चार से पांच दशक पहले की सर्दी की याद दिला दी है। इस बार ‘चिल्ला’ जैसे हालात हैं। शरीर को सुन्न करने देने वाली सर्दी इस दिसंबर माह में छह पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने का नतीजा है। जबकि पूरे सीजन में ऐसा अमूमन 3-4 बार ही होता है। रात में गिर रहा पाला भी गलन का अहसास बढ़ा रहा है।
यूपी में कड़ाके की ठंड से चार दशक बाद 'चिल्ला' जैसे हालात, बारिश-ओलावृष्टि के आसार, 48 घंटे का अलर्ट
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ऐसे बनता है पश्चिमी विक्षोभ
मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन. सुभाष के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी इलाकों में सर्दियों के मौसम में आने वाले ऐसे तूफान को कहते हैं, जो वायुमंडल की ऊंची तहों में भूमध्य सागर, अंध महासागर और कुछ हद तक कैस्पियन सागर से नमी लाकर वहां पर अचानक वर्षा और बर्फ के रूप में उत्तर भारत, पाकिस्तान और नेपाल में गिरा देते है।
उत्तर भारत में रबी की फसल के लिए खासकर गेहूं के लिए यह बहुत जरूरी है। इसके आने से सर्दी का असर तेज रहता है। लगातार सर्दी का दौर बना रहता है।
यह रहता है असर
पश्चिमी विक्षोभ लगातार बनने से पहाड़ों पर बर्फबारी का असर सीधे मैदानी इलाकों में पड़ता है। दिसंबर के दूसरे सप्ताह से पश्चिमी विक्षोभ बनने शुरू हुए। इनमें दो पश्चिमी विक्षोभ तो कम अंतराल पर बनने से सर्दी बढ़ी।
इससे दिन का तापमान सामान्य से 10 से 11 डिग्री तक गिर जाता है। जिसे बेहद ठंडे दिन की स्थिति (कोल्ड डे कंडीशन) कहा जाता है। दिन भर नमी बनी रहती है। रात में पाला बर्फ के गिरने जैसा अहसास कराता है। कुछ स्थानों पर सुबह के समय पाला ऐसे दिखता है जैसे बर्फ गिरी हो। ऐसी सर्दी में कई दिनों तक धूप न खिलने से यह सर्दी गलन का रूप ले लेती है। इससे ठिठुरन बनी रहती है। हाथ-पैर सुन्न होने लगते हैं। कई दशक बाद ऐसी सर्दी देखने को मिली है।
रिकॉर्ड तोड़ने पर आमादा है सर्दी
इस बार की सर्दी दिसंबर में ही रिकॉर्ड तोड़ने पर आमादा है। दो दिन से लगातार बेहद ठंडे दिन की स्थिति बनी है। 20 दिन से मौसम सामान्य से नीचे चल रहा है। 20 दिन से पूरी तरह से धूप न खिलने से ठिठुरन बनी है। दिन के तापमान में सामान्य से 11 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान में भी सामान्य से 7 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
अभी कांपते रहेंगे मैदानी इलाके
अभी 2-3 दिन मौसम का मिजाज ऐसे ही बने रहने की संभावना है। लगातार चल रही शीत लहर मैदानी इलाकों को कंपकंपाती रहेगी। इस साल के अंत में बारिश और ओलावृष्टि के आसार हैं। -डॉ. यूपी शाही, मौसम वैज्ञानिक कृषि विवि