यूपी पुलिस एक तरफ अपनी छवि को सुधारने की भरपूर कोशिशों में लगी रहती है। वहीं दूसरी ओर कुछ पुलिसवाले महकमे को बारी-बारी से दागदार करने में लगे हैं। हाल-फिलहाल की बात करें तो ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब इन पुलिसवालों की वजह से खाकी का दामन दागदार हुआ है। हम आपको बता रहे हैं पश्चिमी यूपी के पांच ऐसे ही बड़े मामले जिन्होंने पुलिस महकमे को किया दागदार: -
पश्चिमी यूपी के पांच बड़े मामले, जब पुलिसवालों ने 'खाकी' के दामन को किया दागदार
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शामली में पत्रकार की बेरहमी से पिटाई
शामली में मंगलवार रात ट्रेन हादसे की कवरेज करने गए एक टीवी चैनल के पत्रकार की जीआरपी एसओ और कांस्टेबल द्वारा पिटाई की गई। इस मामले का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस वीडियो में रेलवे पुलिसकर्मी और साधारण वर्दी में खुद एसएचओ राकेश कुमार पत्रकार को लात-घूंसों से बुरी तरह मार रहे हैं। पत्रकार का मोबाइल भी नीचे गिरा दिया गया। हालांकि इस मामले में जीआरपी थाना एसएचो व आरोपी कांस्टेबल के खिलाफ जांच बैठा दी गई, लेकिन इस मामले ने पुलिस की किरकिरी कर डाली।
मेरठ के लालकुर्ती थाने में किन्नरों को दौड़ा दौडाकर पीटा
दूसरा मामला मेरठ के लालकुर्ती थाने का है। यहां थाना इंचार्ज द्वारा किन्नरों को दौड़ा दौड़ाकर पीटने का वीडियो जैसे ही वायरल हुआ पुलिस महकमे में खलबली मच गई। वहीं इस मामले में लखनऊ से जवाब मांग लिया गया। दरअसल, लालकुर्ती क्षेत्र में बधाई मांगने को लेकर किन्नरों के दो पक्ष आपस में भिड़ गए।
पुलिस दोनों पक्षों को थाने उठा लाई जहां किन्नरों के दोनों गुटों ने जमकर उत्पात मचाया। इस पर लालकुर्ती प्रभारी रोजंत त्यागी के निर्देश पर थाना पुलिस ने किन्नरों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा। इस मामले को पुलिस का अमानवीय चेहरा बताते हुए लालकुर्ती थाना पुलिस की खूब आलोचना हुई, यहां तक कि उच्चाधिकारियों ने भी जवाब तलब कर लिया।
मेरठ में युवक को थाने में दी थर्ड डिग्री
तीसरा मामला मेरठ के देहलीगेट थाना क्षेत्र का है। यहां भी पुलिस पर एक युवक को कस्टडी के दौरान थर्ड डिग्री टॉर्चर देने का आरोप लगा। हिंदू वाहिनी के कार्यकर्ता और पार्किंग के ठेकेदार अक्षित शर्मा को पुलिस ने थाने में इस कदर पीटा कि उसकी हालत बिगड़ गई। इस मामले पर भी लखनऊ से जवाब मांगा गया है।
दरअसल, यहां डीएम कॉलेज में प्रतियोगी बीटीसी की परीक्षा देने पहुंचे थे। यहां पार्किंग में खड़े वाहनों से प्रतियोगियों के पर्स व मोबाइल चोरी हो गए। इस पर पुलिस पार्किंग ठेकेदार को थाने उठा लाई। यहां हालत बिगड़ने पर युवक के परिजनों ने पुलिस पर कस्टडी में थर्ड डिग्री देने और हिंदू वाहिनी के खिलाफ अपशब्द कहने का आरोप लगा दिया। हालांकि इस मामले में अभी जांच चल रही है लेकिन इसके बाद पुलिस की वर्दी पर कई सवाल खड़े हो गए।
दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाने के मामले में खुद फंसी पुलिस
मेरठ में हाईवे पर महिला द्वारा लिफ्ट लेकर झांसा देकर अवैध पैसे की मांग करने और झूठे मुकदमे में फंसाने के मामले में दरोगा, तीन सिपाहियों और दो महिलाओं सहित 15 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मामले में गिरोह में शामिल महिला हाईवे पर राहगीरों की कार व बाइक रुकवाती और गाड़ी में बैठ जाती।
महिला कुछ सामन भूल जाने का बहाना बनाती और पुलिस चौकी के सामने उतर जाती। यहां पहुंचकर महिला शोर मचा देती और कहती कि इस व्यक्ति ने मेरे साथ दुष्कर्म किया है। इस पर चौकी की पुलिस चालक को थाने में बंद कर देती और छोड़ने के नाम पर ब्लैकमेल कर पचास हजार से एक लाख तक की मांग करती। यहां तक कि गाड़ी व बाइक को भी पैसे लेकर छोड़ा जाता। अभियोजन पक्ष द्वारा दी गई तहरीर के बाद पुलिस के इस खेल का खुलासा हुआ। यह एक सनसनीखेज मामला था जिसने न सिर्फ वर्दी को दागदार किया बल्कि पुलिस महकमे को शर्मसार भी कर दिया।