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गंगा को मैला कर रही मृत पशुओं के अवशेषों की सैंकड़ों टन बदबूदार खाद, 'नमामि गंगे' को लगा रहे पलीता

Tue, 03 Dec 2019 05:19 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रविंद्र चौहान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रविंद्र चौहान Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 03 Dec 2019 05:19 PM IST
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fertilizer of dead animals remain polluting the Ganga River in hastinapur meerut
ganga pollution - फोटो : अमर उजाला

मुक्तिदायिनी गंगा खुद ही अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। गंगा को निर्मल-अविरल बनाने के लिए गाजे-बाजे के साथ नमामि गंगा योजना शुरू हुई थी, लेकिन अभी तक फलीभूत नहीं हुई। वजह सरकारी तंत्र की चुप्पी है।



हस्तिनापुर से लेकर गढ़मुक्तेश्वर तक खादर में प्लेज की खेती के लिए सैकड़ों टन दूषित खाद का ढेर लग चुका है। सूचना के बावजूद सरकारी तंत्र कार्रवाई के बजाए चुप्पी साधकर बैठा है। आगे तस्वीरों में देखें आखिर कैसे सैंकड़ों टन बदबूदार खाद गंगा को कर रही है प्रदूषित -
 

fertilizer of dead animals remain polluting the Ganga River in hastinapur meerut
ganga pollution - फोटो : अमर उजाला

हस्तिनापुर क्षेत्र के बड़े भूभाग में गंगा का पाट है। बहाव क्षेत्र हर साल घटता बढ़ता रहता है। दशकों से किसान गंगा के डूब क्षेत्र में खेती करते आ रहे हैं। कुछ सालों से यह खेती का पारंपरिक रूप बदला है। क्षेत्रीय किसान खुद खेती न कर ठेके पर उठा देते हैं। अधिक उत्पादन के लेने के लिए ठेकेदार जमकर खाद का इस्तेमाल करते हैं। फसल तैयार होने के बाद कीटनाशकों का भी जबरदस्त छिड़काव होता है। 

गोबर खाद के साथ मृत पशुओं के अवशेष मिश्रित खाद भी होती है। इस वक्त गंगा के खादर में इस खाद के ढेर लग चुके हैं। सैकड़ों टन खाद गंगा जल के साथ खादर की जमीन को भी प्रदूषित कर रही है। इससे गंगा का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र गड़बड़ा रहा है। गंगा का औषधीय गुण तो नष्ट ही हो रहा है, जलीय जीव-जंतु का जीवन भी खतरे में है। बारिश के सीजन में जमीन में मिले खतरनाक रसायनिक तत्व पानी के साथ घुल जाते हैं। यह सब चलता रहा तो करोड़ों रुपये खर्च कर चलाए जा रहे 'नमामि गंगे' अभियान का कोई हासिल नहीं होने वाला।

fertilizer of dead animals remain polluting the Ganga River in hastinapur meerut
ganga pollution - फोटो : अमर उजाला

डॉल्फिन का अस्तित्व खतरे में
गंगा जल में कीटनाशकों और रसायनिक खाद मिलने से मानव मित्र कहलाए जाने वाली डॉल्फिन के जीवन पर भी संकट उत्पन्न हो सकता है। बिजनौर से नरौरा तक गंगेटिक रीजन में डॉल्फिन की संख्या 40 से ऊपर है। विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा में प्रदूषण बढ़ा तो डॉल्फिन के जीवन को संकट हो जाएगा, क्योंकि डॉल्फिन शुद्ध जल में ही रहती है।

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ganga pollution - फोटो : अमर उजाला

करोड़ों के खेल में नेता भी सक्रिय 
सरकार किसी की भी रही हो, गंगा को मैली करने में कोई पीछे नहीं रहा। अब प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार है। सत्ता पक्ष के नुमाइंदे ही लाखों हेक्टेयर जमीन में मोटी वसूली कर सरकारी तंत्र पर दबाव बनाकर गंगा को मैली करने से बाज नहीं आ रहे हैं। 

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ganga pollution - फोटो : अमर उजाला

पीएम से शिकायत करूंगा
इस पूरे मामले पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग को तत्काल प्रभाव से पुलिस प्रशासन की मदद से एक्शन लेना चाहिए। गंगा के डूब क्षेत्र में इस तरह की खेती और प्रदूषित खाद का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। मैं इसकी शिकायत प्रधानमंत्री और विभागीय मंत्रालय में करूंगा। - रमन त्यागी, निदेशक नीर फाउंडेशन 

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