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हादसे से नहीं हारी फातिमा: शरीर में 194 टांके, कोमा से निकली तो पहले जैसे नहीं थे हाथ-पांव, खेल ने बदला जीवन

Sat, 17 Sep 2022 12:31 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 17 Sep 2022 12:31 PM IST
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fatima khatoon was unable to walk after an accident, now inspiring for differently abled
फातिमा खातून - फोटो : अमर उजाला

सड़क दुर्घटना ने दिव्यांग बनाया तो मेरठ की फातिमा खातून हौसलों के दम पर खेलों में अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। किठौर के राधना गांव की फातिमा खातून (29) एक सड़क हादसे के बाद छह महीने कोमा में रहीं। होश आया तो खुद को व्हीलचेयर पर पाया। इसके बाद भी उन्होंने हौसला नहीं टूटने दिया। नए सिरे से जिंदगी की शुरूआत की और खेलों में नए मुकाम की तलाश में जुट गईं। पैरा खेलों में राष्ट्रीय स्तर के पदक जीतने के बाद उन्होंने चौथी रैंक के साथ एशियन गेम्स में जगह बना ली है।



नॉर्थ अफ्रीका के मोरक्को में आयोजित ग्रैंड प्रिक्स में अब मेरठ की बेटी फातिमा ने चक्का फेंक में कांस्य पदक झटका है, जबकि भाला फेंक में वह चौथा स्थान पर रहीं। छठी अंतरराष्ट्रीय पैरा-एथलेटिक्स मीट में फातिमा ने दो पदकों के साथ 2024 पेरिस पैरालंपिक के लिए क्वालिफाई करने के साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप- 2023 व एशियन गेम्स में भी जगह पक्की कर ली है। वह एशिया में दूसरी रैंक की खिलाड़ी भी बन गई हैं।

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फातिमा खातून

बिजली विभाग में स्टेनोग्राफर के पद पर तैनात फातिमा ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह खेलों में कॅरियर बनाएंगी। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद नौकरी लग गई और बेगमपुल स्थित बिजली विभाग की टेस्ट डिवीजन में तैनाती मिली। जुलाई 2016 में राधना गांव से वह स्कूटी से ऑफिस जा रही थीं कि किठौर में एक कार चालक ने टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हुईं। दोनों हाथ और पैर टूट गए।


 
fatima khatoon was unable to walk after an accident, now inspiring for differently abled
फातिमा खातून

हादसे में फातिमा का चेहरा भी बुरी तरह जख्मी हो गया। शरीर में 194 टांके लगे और वह कोमा में चलीं गईं। आठ बहन-भाइयों में सबसे बड़ी फातिमा के परिजन उम्मीद छोड़ चुके थे। हादसे के बाद उसके दोनों हाथों-पैरों में रॉड डालकर नौ जगह बोल्ट लगाए गए। इसके बाद वो व्हीलचेयर पर आ गईं। दुर्घटना के छह माह बाद फातिमा को होश आया और डेढ़ वर्ष तक बिस्तर पर रहीं।

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फातिमा खातून

दिव्यांगता के साथ खेलों में रखा कदम
सड़क हादसे से पहले फातिमा का खेलों से कोई नाता नहीं था। हादसे के बाद वो ऑफिस से निकलते हुए कभी-कभी व्हील चेयर से भामाशाह पार्क (विक्टोरिया पार्क) घूमने जाती थीं। चार जुलाई 2017 को उन्होंने पैरा खेलों में हाथ आजमाया। यहां कोच गौरव त्यागी के निर्देशन में खेलों में शुरूआत की। आज फातिमा आत्मविश्वास से लबरेज हैं और यही उनकी ताकत है।
 

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फातिमा खातून - फोटो : अमर उजाला

एक ही प्रतियोगिता में जीते तीन गोल्ड मेडल
मार्च 2018 में लखनऊ में आयोजित पैरा स्टेट प्रतियोगिता में फातिमा ने एक साथ तीन गोल्ड मेडल जीते। उन्होंने डिस्कस थ्रो, जेवलिन थ्रो, शॉटपुट में पदक जीता। इसके बाद चंडीगढ़ में पैरा नेशनल में सिल्वर मेडल जीता।

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