नए कृषि कानून के विरोध में दिल्ली सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए पश्चिमी यूपी के किसानों के दिल्ली कूच का सिलसिला जारी है। गुरुवार को भी मेरठ, शामली बागपत समेत कई जिलों के किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रालियों में सवार होकर दिल्ली कूच किया।
किसान आंदोलन: महापंचायत के लिए पश्चिमी यूपी के किसानों को दिल्ली कूच जारी, यूपी गेट पर दिखा हुजूम
यूपी गेट पर आज प्रस्तावित किसान महापंचायत के लिए बुधवार को मेरठ के सैकड़ों किसान कूच कर गए। उनका कहना है कि वे सफलता हासिल किए बिना नहीं लौटेंगे। बता दें कि तीन कृषि बिलों के विरोध में हरियाणा, पंजाब और यूपी के किसानों ने दिल्ली घेर रखी है।
भाकियू ने गाजीपुर बार्डर स्थित यूपी गेट पर डेरा डाल रखा है। वहीं, गुरुवार को किसान महापंचायत आहूत की है। इसके चलते बुधवार को सैकड़ों किसान कूच कर गए। संगठन के जिलाध्यक्ष मनोज त्यागी ने बताया कि ईकड़ी, दबथुआ, करनावल, सरूरपुर, बहादरपुर, जिटौली, नंगलाताशी, दौराला आदि गांवों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में यूपी गेट के लिए रवाना हो गए है।
किसान आंदोलन को पूर्व सैनिकों को भी मिला समर्थन
भारतीय किसान आंदोलन और गंगाजल बिरादरी ने आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में कमिश्नरी पर प्रदर्शन किया। इसके बाद जुलूस ईव्ज चौराहा होते हुए तेजगढ़ी चौराहा एवं बिजली बंबा बाईपास होते हुए दिल्ली रोड के लिए रवाना हुआ। वहीं आंदोलन को पूर्व सैनिकों ने भी जायज ठहराया है।
सैनिकों के साथ साथ चिकित्सक, वकील, शिक्षाविद्, छात्र, व्यापारी और समाजसेवियों ने सहयोग किया। गंगाजल बिरादरी के संयोजक सेवानिवृत्त मेजर डॉ. हिमांशु ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तीनों कृषि कानून किसानों के लिए विनाशकारी हैं।
किसानों ने आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया
शामली जनपद में किसान यूनियन की ग्राम कुरमाली में हुई पंचायत में किसानों से दिल्ली कूच करने का आह्वान किया गया। किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक ने बताया कि किसान बड़ी संख्या में बुधवार को दिल्ली रवाना होंगे। उन्होंने बताया कि खाप चौधरियों ने भी किसान आंदोलन को समर्थन दिया है। उनके नेतृत्व में किसान यूनियन के साथ किसान दिल्ली जाएंगे।
खादर के किसानों का दिल्ली कूच
दिल्ली सीमा पर चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए जिले के किसानों के जाने का सिलसिला जारी है। बुधवार को खादर क्षेत्र के किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रालियों में आंदोलन में शामिल होने के लिए कूच किया। उधर, भाकियू के कई नेता पहले से ही आंदोलन में डेरा डाले हुए हैं।