मेरठ में नकली पेट्रोल व डीजल की बड़ी फैक्टरी का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस के मुताबिक तेल माफिया जलेबी बनाने में इस्तेमाल होने वाले रंग से नकली पेट्रोल व डीजल तैयार करते थे। यही नहीं इनका नेटवर्क यूपी के कई जिलो समेत हरियाणा पंजाब तक फैला हुआ है।
नकली पेट्रोल-डीजल: हरियाणा-पंजाब तक फैला नेटवर्क, परतापुर-टीपीनगर इंस्पेक्टर पर गिरी गाज
पुलिस के मुताबिक तेल माफिया राजीव जैन और प्रदीप गुप्ता ने नकली पेट्रोल-डीजल बनाने का तरीका बताया कि उनके पास थिनर और सॉलवेंट का लाइसेंस है। करीब दस साल से थिनर और सॉलवेंट में रंग मिलाकर वह नकली तेल बनाते हैं। फैक्टरी में पांच-छह कर्मचारी काम करते थे, अधिकांश काम मशीनों से होता था। जिसका दोनों ने डेमो भी करके दिखाया। जमीन में दबे टैंक में थिनर, सॉलवेंट व बैंजीन नोजिल पंपों के जरिये डालकर रंग मिलाया जाता था। एक टैंकर तेल में 30-40 फीसदी नकली पेट्रोल-डीजल मिलाकर पेट्रोल पंपों पर सप्लाई होता था।
मेरठ में तेल माफिया जलेबी के रंग से नकली पेट्रोल और डीजल तैयार करते थे। फैक्टरी के अंदर जमीन में बड़े लोहे के टैंक दबे थे। जिसमें थिनर, सॉलवेंट और बैंजीन का मिश्रण होता था। उसके बाद जलेबी वाला रंग मिलाया जाता था। मिश्रण का रंग पेट्रोल-डीजल जैसा हो जाता था। जिसके बाद इसको टैंकरों में नोजिल के जरिये भरा जाता था।
माफिया का हरियाणा-पंजाब तक नेटवर्क
तेल माफियाओं का नेटवर्क यूपी हरियाणा व पंजाब तक फैला है। जहां पर नकली पेट्रोल-डीजल सप्लाई होता है। एसआईटी की जांच इनके सारे कारनामे उजागर करेगी। इसको लेकर पेट्रोल पंपों की जांच शुरू कर दी गई है, जहां नकली तेल सप्लाई होता था। इस रैकेट में कौन-कौन जुड़े हैं, उनको भी बेनकाब किया जाएगा।
पूछताछ में राजीव जैन और प्रदीप गुप्ता ने बताया कि एक साथ करीब 11 हजार लीटर नकली तेल तैयार हो जाता है। चार-पांच टैंकर रोजाना एक फैक्टरी में तैयार होता है। आईओसी द्वारा पेट्रोल-डीजल से भरे टैंकर सुबह से तेल माफियाओं की फैक्टरी में आने शुरू होते हैं। असली पेट्रोल और डीजल को ड्रमों में भरा जाता है। 30-40 फीसदी पेट्रोल निकालने के बाद नकली तेल टैंकर में भरा जाता है। केमिकल बैंजीन को वह बरनाला पंजाब से खरीदते हैं।
आरोपी राजीव जैन और प्रदीप गुप्ता के पिता लवकुश गुप्ता दस साल से ये अवैध धंधा चला रहे हैं। शुरूआत में धंधा लिमिट में था। लेकिन धीरे धीरे यूपी, हरियाणा और पंजाब तक फैलता गया। अब माफिया राजीव जैन ने तीन पेट्रोल पंप खोल दिए, जहां पर नकली तेल धड़ल्ले से बिक रहा था। रिश्तेदार और परिचितों को सस्ते दामों पर नकली पेट्रोल-डीजल बेचा जाता था। शहर के कई पेट्रोल पंपों पर नकली तेल सप्लाई करते हैं।
आरोपियों से पूछताछ कर पेट्रोल पंपों से सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। टैंकरों के ड्राइवर आरोपियों से साठगांठ कर पेट्रोल पंप के बजाय टैंकर माफियाओं की फैक्टरी पर लाते थे। 30-40 फीसदी नकली पेट्रोल-डीजल भरने के बाद टैंकर पेट्रोल पंपों पर पहुंचता था। इसकी जानकारी पेट्रोल पंपों के मालिकों को भी थी।
परतापुर और टीपीनगर इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच भी बैठी
लंबे समय से परतापुर और टीपीनगर में नकली तेल बनाने का अवैध कारोबार दोनों थानों की पुलिस की साठगांठ से चल रहा था। प्राथमिक जांच में संदिग्ध भूमिका देखते इंस्पेक्टर परतापुर सुभाष अत्री को लाइन हाजिर और इंस्पेक्टर टीपीनगर को सस्पेंड किया गया है। दोनों इंस्पेक्टरों पर विभागीय जांच बैठा दी गई।
एसआईटी तेल माफियाओं व दोनों थाना पुलिस की पोल खोलेगी। आईजी आलोक सिंह ने क्राइम ब्रांच की टीमें बनाकर परतापुर और टीपीनगर में नकली पेट्रोल-डीजल बनाने वालों का भंडाफोड़ किया। बड़ा सवाल कि दस साल से अवैध धंधा चलता रहा और पुलिस अनजान बनी रही। इसको लेकर परतापुर और टीपीनगर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे थे।