मेरठ में मिलावटी पेट्रोल-डीजल खुलासे के पुलिस-प्रशासन की बड़ी कार्रवाई के बाद जहां एसआईटी जांच में जुटी है वहीं शनिवार को मालूम चला कि गरीबों के घरों में उजाला करने वाले तेल से शहर की नामचीन फर्म रतिराम खूबचंद बड़ा खिलवाड़ कर रही थी। जांच टीम का मानना है कि यह तेल पेट्रोल पंपों पर मिलावट के लिए जाता होगा।
नकली पेट्रोल-डीजल का खेल: जमीन के नीचे टैंकों में दबा था गरीबों के घर रोशन करने वाला तेल
रतिराम खूबचंद फर्म के पास 48 हजार लीटर केरोसिन ऑयल वितरण के लिए आया था। जिसका रिकॉर्ड में पूरा आवंटन भी दर्शाया गया है। लेकिन इसके अतिरिक्त 70 हजार लीटर केरोसिन ऑयल मिलने ने अवैध स्टॉक की न केवल पोल खोल दी, बल्कि तेल के काले कारोबार का भी पूरी तरह खुलासा कर दिया।
अमर उजाला लगातार केरोसिन की कालाबाजारी को भी पहले ही दिन से प्रकाशित कर रहा था। जिसमें इस केरोसिन के माध्यम से मिलावटी डीजल बनाने के कारोबार को निशाना बनाया जा रहा था। ये समाचार शनिवार को इस अवैध स्टॉक के साथ पुष्ट हो गए।
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टैंकों में दूसरी जगह लगे नोजिल पंप
जांच टीम के मुताबिक जमीन में दबे टैंकरों में दो जगह पर नोजिल पंप लगे थे। एक वहां, जहां से एक नंबर से केरोसिन निकलता था व दूसरा टैंकर की निचली परत पर लगा था, जहां पर नोजिल पंप से तेल टैंकरों में भरकर पेट्रोल पंपों पर जाता था। यह बताया गया कि टैंकरों में दो परतें बनी थी।
ऊपरी परत की जानकारी जांच टीम कर सकती थी, लेकिन निचली परत गोपनीय थी। जहां से तेल का काला खेल चलता था। शुरूआत में तो जांच टीम भी गच्चा खा गई थी। क्योंकि मापतौल टीम ने टैंक में गेज डाला, जिसमें केरोसिन न होना पाया गया।
इसके बाद सटीक सूचना के आधार पर यह छापामारी हुई थी तो एडीएम सिटी ने ऊंचाई से गेज को झटके के साथ टैंकर में डलवाया। जिस पर कुछ टूटने जैसी आवाज आई और गेज और ज्यादा गहराई तक चला गया।
जब गेज बाहर आया तो पता चला कि यहां 40 हजार लीटर केरोसिन ऑयल गुपचुप तरीके से छिपाया गया था। इसके बाद दूसरे नॉजिल के जरिये भी गेज डाला गया तो वहां पर 30 हजार लीटर तेल पाया गया। वहीं, अंदेशा कि यहां चार टैंकों के अलावा और भी टैंक जमीन मेें दबे है। इसको लेकर रविवार को जेसीबी से खुदाई करने की तैयारी है। जमीन में दबे टैंकों में कितना केरोसिन होगा, इसकी पोल खुदाई के बाद खुलेगी।
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ऑयल डिपो के सीसीटीवी कैमरे ऑनलाइन किए
तेल के इस खेल में किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी हो। जिलाधिकारी ने न केवल सीसीटीवी कैमरे लगाए, बल्कि उन्हें एनआईसी से कनेक्ट करा दिया। साथ ही एक कर्मचारी की मानीटरिंग के लिए ड्यूटी लगा दी। कैमरों को ऑटो रिकार्डिंग पर रखा है ताकि कैमरे से जरा भी छेड़छाड़ हो तो पूरा रिकॉर्ड मिल जाए।
वहीं, प्रशासनिक स्तर से देर शाम परतापुर थाने में आरोपी तेल कारोबारी के खिलाफ तहरीर दे दी गई। लेकिन पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने में हीलाहवाली करती रही। इसके पीछे माना जा रहा है कि रिपोर्ट देर रात दर्ज की जाए, ताकि मीडिया में खबर आने से बच सके। ऐसे में अब लोगों की नजर पुलिस कार्रवाई पर टिकी है।