मेरठ में एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने के मामले में नामजद भाजपा नेता संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता को पुलिस और एसटीएफ पकड़ने में विफल साबित हो रही है। चर्चा है कि दोनों आरोपियों को भाजपा के एक कद्दावर नेता का संरक्षण मिला हुआ है। जिसके चलते पुलिस ने पांच दिन बाद भी न तो आरोपियों पर इनाम घोषित किया और न ही गिरफ्तारी वारंट लिया।
नकली किताब मामला: आरोपियों को भाजपा के कद्दावर नेता का संरक्षण, संजीव और सचिन गुप्ता पुलिस की पकड़ से दूर
- एनसीईआरटी की नकली किताबों के भंडाफोड़ का मामला
- करोड़ों की नकली किताबें छापने के आरोपियों को भाजपा के कद्दावर नेता का संरक्षण
- नामजद आरोपी भाजपा नेता संजीव और सचिन गुप्ता को पुलिस पकड़ने में नाकामयाब
नकली किताबों का भंडाफोड़ हुए पांच दिन बीत गए हैं। इस मामले में थाना परतापुर पर 22 अगस्त को भाजपा नेता संजीव और सचिन गुप्ता, विकास त्यागी और नफीस समेत आठ आरोपियों को नामजद किया गया था।
इनमें पुलिस ने शिवम, राहुल, आकाश, सुनील को ही गिरफ्तार किया जबकि मुख्य आरोपी चाचा भतीजा संजीव और सचिन को गिरफ्तार करने का प्रयास नहीं किया। दोनों आरोपी अपने बचाव में लगातार पैरवी कर रहे हैं। कई पुलिसकर्मी उनके संपर्क में हैं। व्हाट्सएप कॉल के जरिए दोनों आरोपी अपने परिचितों से बात भी कर रहे हैं।
विपक्ष मुखर, आरोपियों का बचाव
विपक्ष इस मामले में खुलकर आरोप लगा रहा है। रोजाना प्रदर्शन किए जा रहे हैं। भाजपा ने महानगर उपाध्यक्ष पद से संजीव गुप्ता को भले ही निलंबित कर दिया हो। लेकिन अभी भी उसको बचाने के तमाम प्रयास चल रहे हैं।
बताया जा रहा है कि नकली किताब छापने और सप्लाई करने में दोनों आरोपियों के साथ सत्ताधारी पार्टी के कई लोग शामिल हैं। भाजपा नेता से जुड़े करीबी लोगों के नाम एसटीएफ की सूची में हैं। लेकिन अभी कार्रवाई नहीं हो रही है। नामजद आरोपियों को भी पुलिस गिरफ्तार करने से बच रही है।
बिजनौर में दी दबिश
भाजपा नेता संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता की तलाश में एसटीएफ की टीम ने मंगलवार को बिजनौर में दबिश दी। हालांकि आरोपियों का कोई सुराग नहीं लगा है।
124 प्रकाशकों की जांच शुरू
एसटीएफ की जांच में संजीव गुप्ता की पब्लिकेशन फर्म टीएनएचके पब्लिकेशन के साथ 124 प्रकाशक भी शामिल बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने वालों का नेटवर्क दूर तक फैला है।
संजीव और सचिन गुप्ता के अलावा भी अभी कई प्रकाशक हैं, जो यह धंधा करते हैं। मेरठ में भी कई प्रकाशक हैं, जो एनसीईआरटी की नकली किताबें छाप रहे है। इन सभी की एसटीएफ और पुलिस गुपचुप तरीके से जांच कर रही है।
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