शहीद मेजर केतन शर्मा के घर कोहराम मचा था। मां बिलखते हुए चिल्ला रही थी... मेरे शेर को बुला दो। जल्दी बुला दो। वे चुप होतीं तो बहन की रुलाई फूट पड़ती। कभी भाई के साथ रहे अफसरों से सवाल करती तो कभी बेसुध होकर गिर जाती। पत्नी का बुरा हाल था।
मां की चीत्कार, पिता की पुकार के बीच शहीद बेटे को अंतिम विदाई, ऐसे गुजरे आंसू और सिसकियों के 26 घंटे
26 मई को ही केतन छुट्टी से ड्यूटी पर लौटे थे। 23 दिन बाद सोमवार दोपहर के करीब ढाई बजे तक कंकरखेड़ा के श्रद्धापुरी सेक्टर चार में रहने वाले रविंद्र कुमार शर्मा के घर में सब कुछ रोजाना की तरह था। अचानक एक अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने बताया कि वे केतन की यूनिट से बोल रहे हैं। बताया कि एक ऑपरेशन के दौरान केतन घायल हो गए हैं। शाम करीब 4:30 बजे मेरठ छावनी से सेना के अफसरों ने घर पहुंचकर रविंद्र शर्मा को नमस्ते की तो उनका दिल तेजी से धड़कने लगा।
...फफक पड़े पिता
अफसरों ने हाथ जोड़कर बताया कि आपके बेटे मेजर केतन शर्मा देश के लिए शहीद हो गए हैं। यह सुनकर रविंद्र कुछ देर के लिए जड़ हो गए। खुद को संभाला और भारी मन से घर से बाहर निकले और फफक पड़े। सेना के अफसरों से आंसुओं के बीच कहा कि केतन की मां ऊषा बीमार है। उसे यह पता चल गया तो वह सहन नहीं कर पाएंगी। पड़ोस में रहने वाले बड़े भाई अशोक शर्मा और केतन की मौसी रिंपल शर्मा को जानकारी हुई तो कोहराम मच गया।
मां ने पूछा तो बताया कि केतन घायल हो गया। रात होते-होते सारी रिश्तेदारियों में ये मनहूस खबर पहुंच गई कि परिवार का इकलौता बेटा चला गया है। आधी रात को मेजर केतन की पत्नी इरा शर्मा दिल्ली मायके से और बहन मेघा बठिंडा (पंजाब) से घर पहुंचीं तो कोहराम मच गया। पत्नी और बहन मेघा बेसुध हो गईं। मां ऊषा का बुरा हाल हो गया। पिता ने किसी तरह आंसू रोके लेकिन बहू और बेटी की हालत देखकर वे आंसुओं के सैलाब को रोक न सके।
बेटे का चेहरा तो दिखा दो...
पूरा दिन सिसकियों-चीत्कार में बीता। एक-एक पल परिवार पर किस तरह बीता, ये कोई नहीं बता सकता। न सोच सकता है। मंगलवार मध्याह्न करीब 3:10 बजे शहीद केतन का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो चीख पुकार मच गई। मां ऊषा चीख पड़ीं कि मेरे बेटे का चेहरा तो दिखा दो। बस एक बार दिखा दो।