दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण में 37500 हजार पेड़ बाधा बन रहे हैं। इनमें 461 संरक्षित वन क्षेत्र, 689 ग्राम पंचायतों और अन्य सरकारी विभागों के हैं। अन्य पेड़ जिन किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है, उनके हैं। यह पेड़ हटेंगे, तभी इस कॉरिडोर का निर्माण शुरू हो पाएगा।
Green field corridor: बलि चढ़ेंगे 37500 पेड़, पर्यावरण विशेषज्ञों ने तैयार की सर्वे रिपोर्ट, भूमि अधिग्रहित
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण की शुरूआत मार्च 2021 में हुई थी। इसमें ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से दिल्ली यूपी बॉर्डर तक करीब 17 किमी लंबी छह लेन की एलिवेटेड रोड का निर्माण होना है।
हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली, यमुनानगर, बागपत, मेरठ व बड़ौत को जोड़ने के लिए सात इंटरचेंज बनेंगे।
अधिग्रहण की गई जमीन
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत के 27 गांवों, मुजफ्फरनगर के सात और शामली के 22 गांवों, सहारनपुर के 25 गांवों की 1100 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। यह जमीन ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से सहारनपुर तक है। इसमें बागपत की 350 हेक्टेयर जमीन शामिल है।
अधिकांश किसानों को दिया जा चुका है मुआवजा
डीएफओ हेमंत सेठ ने बताया कि सर्वे कर पेड़ों के छपान की सूची दे दी है, उसको क्रॉस चेक करने के लिए विभागीय टीम लगी है। किसानों के निजी पेड़ों के कटान के लिए कुछ किसानों को छोड़कर अधिकांश किसानों को संतोषजनक मुआवजा प्राप्त हो चुका है। क्रॉस चेक रिपोर्ट जल्द ही मिलने वाली है, जिसके बाद निर्माण के लिए बाधक बने पेड़ों को हटाया जाएगा।