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परिवार का लाडला था आफताब, बनना चाहता था डॉक्टर, दिल्ली हिंसा में गई जान, परिवार में मचा कोहराम

Wed, 04 Mar 2020 02:25 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: कपिल kapil Updated Wed, 04 Mar 2020 02:25 AM IST
सार

दिल्ली हिंसा में मारे गए आफताब का शव मंगलवार को घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया।

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Delhi Violence, Aftab of Bijnor, who was killed in violence, wanted to become a doctor
सांत्वना देने वालों का लगा तांता और साइड में आफताब का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली हिंसा में मारे गए आफताब का शव मंगलवार देर शाम घर पहुंचने पर कोहराम मच गया। पीड़ित के घर पर सांत्वना देने वालों की भीड़ लग गई। सुरक्षा के लिहाज से प्रभारी निरीक्षक संजय पांचाल पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। अगली स्लाइडों में जानिए पूरी जानकारी-

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दिल्ली हिंसा - फोटो : PTI

बिजनौर जनपद में नूरपुर के मोहल्ला शहीदनगर निवासी मोहम्मद उमर का छोटा बेटा आफताब 13 फरवरी को मोहल्ले के ही दो युवकों के साथ दिल्ली में मजदूरी करने गया था। वह शिव विहार में हनुमान मंदिर के पास रहकर कूलर की जाली बनाने का काम करता था। 24 फरवरी को दिल्ली में हुई हिंसा में वह लापता हो गया था। परिजन उसको दिल्ली के अस्पतालों में तलाश कर रहे थे।

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गमजदा आफताब के परिजन - फोटो : अमर उजाला

सोमवार को उसका शव आरएमएल अस्पताल की मोर्चरी में मिला। मंगलवार शाम साढ़े छह बजे परिजन शव लेकर नूरपुर पहुंचे। आफताब की मां रहीसन और बहनों का रो- रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने बताया कि शव को रात में ही सुपुर्द ए खाक किया जाएगा।

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दिल्ली हिंसा - फोटो : Amar Ujala

आफताब अहमद के घर की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है। आफताब डॉक्टर बनना चाहता था, इसलिए वह पढ़ाई के साथ नौकरी करके घर खर्च में सहयोग करना चाहता था।

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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला

परिजनों के अनुसार आफताब पढ़ने में होशियार था और कस्बे के न्यू हैवन इंटर कॉलेज में कक्षा 11 का छात्र था। बड़े भाई फुरकान ने बताया कि आफताब चार बहनों और छह भाईयों में छोटा होने के कारण सबका लाडला था। परिवार की आर्थिक हालत खराब होने के कारण वह नौकरी करने दिल्ली गया, जबकि परिजनों ने उसे मना भी किया था।

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