हिस्ट्रीशीटर भूपेंद्र बाफर को पुलिस-प्रशासन ने वीआईपी बनाया हुआ था। उसका आपराधिक रिकॉर्ड छुपाकर नियमों को धज्जियां उड़ाकर उसे दो सरकारी गनर दिए थे। सरकारी असलहों से लैस दोनों पुलिसकर्मियों के बीच बाफर चलता था। इनके जरिये बाफर मेरठ, मुजफ्फरनगर और बागपत जिले में धौंस जमाता था।
सरकारी गनर लेकर वीआईपी बना था कुख्यात 'बाफर', पश्चिमी यूपी के इन जिलों में जमाता था धौंस
जेल से जमानत पर छूटने के बाद भूपेंद्र बाफर राजनीतिक लोगों के संपर्क में रहने लगा। जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा, जिसमें वह हार गया। पत्नी बीडीसी सदस्य का चुनाव जीत गई।
पुलिस के मुताबिक वह अपराध में एक्टिव रहने लगा। उसकी सुशील मूंछ से दुश्मनी चल रही है, इसकी जानकारी भी राजनीतिक लोगों को थी। दो माह पहले सुशील मूंछ जेल में चला गया। जिसके बाद बाफर ने अफवाह उड़ा दी कि वह पुलिस से साठगांठ करके जेल में गया है।
इसके बाद बाफर ने अपनी जान का खतरा बताना शुरू कर दिया। राजनीतिक लोगों ने पुलिस से सेटिंग कराकर उसे सरकारी गनर दिला दिए। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने भी आंख मूंदकर हिस्ट्रीशीटर भूपेंद्र बाफर की सुरक्षा में दो गनर दे दिए थे। इसको अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में प्रकाशित किया। जिस पर शासन ने जांच बैठा दी।
एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि बाफर को डीएम अनिल ढींगरा, तत्कालीन एसएसपी नितिन तिवारी और सीओ एलआईयू की अनुमति पर पुलिस लाइन से आर्म्स पुलिस के दो सिपाही सतीश, अमित दिए गए थे। दरोगा की हत्या कर रोहित उर्फ सांडू की फरारी में बाफर की गिरफ्तारी के दौरान भी दोनों गनर मौजूद थे।
कैसे मिलते हैं सुरक्षा के लिए गनर
सरकारी सुरक्षा मुहैया कराने के लिए जनपदीय कमेटी बनी हुई है। जिसमें डीएम, एसएसपी, सीओ एलआईयू होते हैं। सीओ एलआईयू जांच करके रिपोर्ट डीएम-एसएसपी को देते हैं। उसके बाद डीएम-एसएसपी संस्तुति करते हैं। तभी सुरक्षा मुहैया होती है।
जांच रिपोर्ट में गनर देने वाले का आपराधिक रिकॉर्ड व मुकदमे भी देखे जाते हैं। जिसको गनर देना है, उसके जीवन में कितना भय है। किस मुकदमे में वादी या फिर गवाह बना है। यह तमाम प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही गनर दिया जाता है। हिस्ट्रीशीटर बाफर को गनर देने से पहले पुलिस ने इन नियमों का पालन किया या नहीं, इसका खुलासा जांच पड़ताल के बाद ही होगा।
दोनों सिपाहियों से होगी पूछताछ
एसएसपी के मुताबिक दोनों सिपाही दो महीने तक बाफर के साथ रहे। बाफर किन नेताओें के पास और कहां-कहां जाता था। इसकी जानकारी सिपाहियों से भी ली जाएगी।
बाफर का अपराध की दुनिया में कितना हस्तक्षेप था, इसकी जांच कराई जा रही है। कुख्यात रोहित उर्फ सांडू को उसने कहां छुपाया है, इसकी तलाश मेरठ पुलिस ने भी शुरू कर दी।