सॉल्वर गैंग के सरगना अरविंद राणा ने एसटीएफ को पूछताछ में बताया कि उसके पास अलग-अलग परीक्षाओं के सॉल्वर थे। कुछ परीक्षाओं में सॉल्वर लिखित परीक्षा देने में कामयाब भी हुए। कपड़ों में छोटी सी डिवाइस लगाकर सॉल्वर को परीक्षा में बैठाया जाता था। सॉल्वर डिवाइस और ब्लूटूथ का भी सहारा लेते थे। 2013 में इस गैंग की धरपकड़ के लिए दिल्ली पुलिस और एसटीएफ यूपी ने जाल बिछाया था। अगली स्लाइडों में जानिए आखिर राणा ने चंद सालों में 10 करोड़ कैसे कमाए-
आखिर कौन है अरविंद राणा, जिसने चंद सालों में कमाए 10 करोड़, पूछताछ में उगले बड़े राज
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सीओ एसटीएफ बृजेश सिंह ने बताया कि मुख्य नकल माफिया अरविंद राणा गांव बझेड़ी, थाना झिंझाना जिला शामली का मूल निवासी है। वह वर्तमान में अक्षरधाम कॉलोनी, पल्लवपुरम मेरठ में रह रहा था। पूछताछ में अरविंद ने एसटीएफ को बताया कि बीएससी करने के बाद एमए की पढ़ाई की। बड़ौत में कोचिंग सेंटर खोला। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवक अरविंद राणा को गुरुजी कहकर पैर छूने लगे। उसके पास इस समय तीन गाड़ी बताई गई हैं। बागपत में जमीन और बड़ौत में एक मकान खरीदा। अपने पैतृक गांव में भी परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर जमीन खरीदी। शामली में 50 लाख रुपये की कीमत के दो प्लॉट खरीदे। पत्नी के नाम पर एक फ्लैट पल्लवपुरम की अक्षरधाम कॉलोनी में खरीदने की बात कबूल की है।
अरविंद राणा ने अपने गैंग में यूपी के अलावा, बिहार, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के भी सॉल्वर शामिल किए। यह गैंग करीब पिछले पांच सालों में ही दो हजार से अधिक अभ्यर्थियों से पैसा वसूल चुका है। कई भर्तियों में सात-सात लाख रुपये भी वसूले। सीओ का कहना है इस गैंग के अन्य सॉल्वर फरार हैं जो अरविंद से 10 साल से जुड़े हैं। करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अवैध तरीके से अर्जित की जा चुकी है। कई राज्यों की पुलिस के लिए अरविंद मुसीबत बन हुआ था। 2013 में वह कोर्ट में सरेंडर कर जेल गया था। उसके बाद उसकी गिरफ्तारी चुनौती बनी हुई थी। सीओ का कहना है पांच साल में 50 से अधिक मोबाइल नंबर अरविंद बदल चुका है। अधिकांश कॉल व्हाट्सएप पर करता था। गिरोह में करीब 200 से ज्यादा सॉल्वर अलग-अलग राज्यों में जुड़े हैं।
कस्टम अधिकारी की हुई थी गिरफ्तारी
सीओ एसटीएफ ने बताया कि 22 जनवरी 2019 को एसटीएफ ने कई स्थानों पर छापे मारे थे। एसटीएफ ने अरविंद के साथी रहे बागपत के विजय तोमर उर्फ नीटू ने भी कई राज्यों में सॉल्वर गैंग का ऐसा जाल बिछाया हुआ था कि अभ्यर्थियों का उससे मिलना भी मुश्किल होता था। यूपी पुलिस में सिपाही भर्ती से लेकर केंद्रीय सेवाओं की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में इस गैंग ने सेंधमारी की कोशिश की और अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली। ट्यूबवेल ऑपरेटर की परीक्षा में इस गिरोह ने करीब 150 अभ्यर्थियों से पांच-पांच लाख रुपये तय किए थे। परीक्षा से पहले आधा पैसा लिया था। रेलवे में ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा में भी अभ्यर्थियों से मोटा पैसा ठगा। ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी की भर्ती में भी अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से आंसर शीट भेजकर पैसे वसूले। दिल्ली और बिहार में एसएससी की परीक्षा में भी इस गिरोह ने सॉल्वर बैठाए, जहां दिल्ली से एसटीएफ ने पांच लोगों को 20 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया था। यूपी पुलिस सिपाही भर्ती के अलावा एसआई भर्ती में भी अभ्यर्थियों को झांसा देकर यह गिरोह पैसा वसूल चुका है। कस्टम अधीक्षक विजय तोमर उर्फ नीटू के पास पेपर और आंसर शीट सोनीपत का विक्रम भेजता था। विक्रम से विजय की 10 साल से दोस्ती है।
गैंग से जुड़े 72 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
एसटीएफ सीओ बृजेश सिंह के अनुसार इस गैंग से जुड़े करीब 72 लोगों को एसटीएफ गिरफ्तार कर चुकी है। जून और अक्तूबर 2018 में एसटीएफ ने सिपाही भर्ती के दौरान सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश कर नौ लोगों की गिरफ्तारी की थी। इनमें एक निजी संस्थान का मैनेजर भी था। सितंबर 2018 में पीजीटी पेपर आउट में चार आरोपी हत्थे चढ़े। 26 नवंबर 2018 को एसटीएफ ने सेना भर्ती में 80 युवाओं को ठग चुके रिटायर्ड फौजी समेत तीन आरोपी कंकरखेड़ा से दबोचे थे। उनमें एक साथी अरविंद राणा गैंग से जुड़ा था। सितंबर 2019 में आईबी के सिक्योरिटी असिस्टेंट पद के लिए लिखित परीक्षा थी। जिसमें कसेरू बक्सर निवासी रोहित परीक्षा देते गिरफ्तार हुआ था।