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Saharanpur News: सांप ने डसा, झाड़फूंक कराते रहे परिजन, चली गई जान
Wed, 09 Sep 2026 12:57 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 09 Sep 2026 12:57 AM IST
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गंगोह। टिडौली गांव में सांप के जहर से ज्यादा जानलेवा अंधविश्वास साबित हुआ। सोमवार शाम सांप के डसने के बाद 42 वर्षीय मुर्तजा को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन करीब तीन घंटे तक झाड़-फूंक के लिए इधर-उधर भटकाते रहे। जब हालत बिगड़ी तो रात करीब नौ बजे उसे गंगोह सीएचसी लाया गया। चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
शाम करीब छह बजे मुर्तजा घर के पास बिटोड़े से उपले निकाल रही थी। पति तालिब ने बताया कि इसी दौरान मुर्तजा को काले रंग के सांप ने डस लिया। सांप के डसने के बाद महिला किसी तरह घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। परिजन महिला को अस्पताल ले जाने के बजाय पहले जांड़खेड़ा गांव में झाड़-फूंक कराने के लिए ले गए। इसके बाद भी कई स्थानों पर झाड़-फूंक और उपचार कराया गया, लेकिन महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। करीब तीन घंटे बाद परिजन उसे गंगोह सीएचसी लेकर पहुंचे। तब तक काफी देर हो चुकी थी और जहर पूरे शरीर में फैल चुका था। डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
सीएचसी प्रभारी डॉ. रोहित वालिया ने बताया कि महिला को रात करीब नौ बजे अस्पताल लाया गया था। सांप के डसने के तुरंत बाद महिला को अस्पताल लाकर आवश्यक उपचार दिलाया जाता तो उसकी जान बचने की संभावना थी। झाड़-फूंक के चक्कर में उपचार में देरी मरीज की स्थिति को गंभीर बना देती है।
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- जहर से लड़ना है तो छोड़िए अंधविश्वास
जिले में हर माह करीब 20 से 25 लोग सर्पदंश के बाद जिला अस्पताल पहुंचते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सांप काटने के बाद झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और घरेलू उपचार पर भरोसा करने के मामले सामने आते हैं। कुछ माह पहले भी गंगोह क्षेत्र में इसी तरह एक महिला की सांप के डसने से मौत हुई थी। सर्पदंश के बाद एंटी-स्नेक वेनम और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत होती है।
- सर्पदंश पर यह करें :
- सांप के काटते ही बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
- झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं।
- प्रभावित स्थान पर कसकर रस्सी या कपड़ा न बांधें।
- मरीज को शांत रखें और अनावश्यक चलने-फिरने न दें।
- घाव को काटें नहीं और जहर चूसने की कोशिश न करें।
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शाम करीब छह बजे मुर्तजा घर के पास बिटोड़े से उपले निकाल रही थी। पति तालिब ने बताया कि इसी दौरान मुर्तजा को काले रंग के सांप ने डस लिया। सांप के डसने के बाद महिला किसी तरह घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। परिजन महिला को अस्पताल ले जाने के बजाय पहले जांड़खेड़ा गांव में झाड़-फूंक कराने के लिए ले गए। इसके बाद भी कई स्थानों पर झाड़-फूंक और उपचार कराया गया, लेकिन महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। करीब तीन घंटे बाद परिजन उसे गंगोह सीएचसी लेकर पहुंचे। तब तक काफी देर हो चुकी थी और जहर पूरे शरीर में फैल चुका था। डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
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सीएचसी प्रभारी डॉ. रोहित वालिया ने बताया कि महिला को रात करीब नौ बजे अस्पताल लाया गया था। सांप के डसने के तुरंत बाद महिला को अस्पताल लाकर आवश्यक उपचार दिलाया जाता तो उसकी जान बचने की संभावना थी। झाड़-फूंक के चक्कर में उपचार में देरी मरीज की स्थिति को गंभीर बना देती है।
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- जहर से लड़ना है तो छोड़िए अंधविश्वास
जिले में हर माह करीब 20 से 25 लोग सर्पदंश के बाद जिला अस्पताल पहुंचते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सांप काटने के बाद झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और घरेलू उपचार पर भरोसा करने के मामले सामने आते हैं। कुछ माह पहले भी गंगोह क्षेत्र में इसी तरह एक महिला की सांप के डसने से मौत हुई थी। सर्पदंश के बाद एंटी-स्नेक वेनम और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत होती है।
- सर्पदंश पर यह करें :
- सांप के काटते ही बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
- झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं।
- प्रभावित स्थान पर कसकर रस्सी या कपड़ा न बांधें।
- मरीज को शांत रखें और अनावश्यक चलने-फिरने न दें।
- घाव को काटें नहीं और जहर चूसने की कोशिश न करें।