केरल के चरमपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) सीएए के विरोध की आड़ में देशभर में दंगा कराना चाहता था। 40 दिन पहले फंडिंग के साथ लोगों को हथियार उपलब्ध कराए गए। सरकार और पुलिस प्रशासन की मुखालिफत करने वाले लोगों को पहले चिह्नित किया गया और फिर उन्हीं के जरिये हिंसा की पटकथा रची गई। आगे जानिए पूरा अपडेट-
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पुलिस चौकी को फूंका था
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20 दिसंबर को देशभर में एक साथ हिंसा हुई। जिसमें मेरठ में सबसे ज्यादा छह लोगों की मौत हुई। ईडी के खुलासे के बाद मेरठ पुलिस गंभीरता से जांच करने में जुटी है।
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पथराव करते उपद्रवी
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तारीख 20 दिसंबर थी और दिन शुक्रवार। पीएफआई के प्लान के अनुसार मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बाजार बंद थे। इंतजार था दोपहर 2:30 बजे जुमे की नमाज का। जिम्मेदार लोग भी मोबाइल स्विच ऑफ करके शहर से दूर चले गए, ताकि कोई आरोप न लगे। नमाज होते ही पीएफआई के सदस्य लोगों की भीड़ के साथ सड़कों पर आने शुरू हो गए। मेरठ में लिसाड़ी गेट चौराहे से हिंसा की शुरुआत हुई। सीएए के विरोध में नारेबाजी शुरू हुई व फिर पुलिस पर पथराव हुआ। मामला बढ़ते ही गोलियां चलानी शुरू कर दी। यह जानकारी पीएफआई से जुडे़ मुईद, नूरहसन, जावेद और अमजद ने पुलिस को पूछताछ में दी थी।
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प्रवीण कुमार आईजी रेंज मेरठ
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पुलिस पर गोली चलाने वाले अनीस उर्फ खलीफा, अनस समेत तीन आरोपियों ने भी यह बात पुलिस को बताई थी। इसके बावजूद भी पुलिस गंभीर नहीं हुई। सोमवार को ईडी के खुलासे के बाद पुलिस ने जेल भेजे चारों आरोपियों से जानकारी फिर से जुटाई। आईजी रेंज मेरठ प्रवीण कुमार ने इंस्पेक्टर लिसाड़ीगेट प्रशांत कपिल से जावेद, अमजद और इंस्पेक्टर नौचंदी आशुतोष कुमार से मुईद, नूर हसन पर की गई कार्रवाई की जानकारी ली। चारों आरोपी 25 दिसंबर को गिरफ्तार हुए थे।
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उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर की थी फायरिंग
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इसके अलावा दूसरे जनपदों से भी सुरक्षा एजेंसियां ने भी जानकारी ली। जिसमें खुलासा हुआ कि सीएए के विरोध में देशभर में बड़ी हिंसा कराने के लिये पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने बड़ी फंडिंग की। जांच में सामने आया कि नौ नवंबर को अयोध्या फैसले के आते ही पीएफआई ने मेरठ समेत कई जिलों में फंडिंग की है। पुलिस ने बैंकों से इसका रिकॉर्ड ले लिया है। मेरठ पुलिस ने 12 लोगों को नोटिस भेजकर इसका जवाब मांगा है और अगली कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।