गन्ना मंत्री के गनर (सिपाही) आशीष की हत्या का मामला अभी उलझा हुआ है। आशीष के परिजन जहां इसे हत्या बता रहे हैं तो पुलिस आत्महत्या मानकर चल रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट से काफी हद तक स्थिति साफ हो जाएगी।
मंत्री के गनर की हत्या में उलझी पुलिस, परिजन बोले- इकलौता बेटा क्यों करेगा आत्महत्या
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आशीष के पिता संजीव सिंह ने बताया कि आशीष उनका इकलौता बेटा था। उसकी शादी गांव भराला निवासी पारुल से पांच साल पहले हुई थी। आशीष के ससुराल वालों ने चार महीने पहले उनके खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में बाद में समझौता हो गया था। जिसमें समझौते के अनुसार जेवरात व नगदी देने पर ससुराल वालों ने समझौता कर मुकदमा वापस ले लिया था। मंगलवार को तलाक के लिए तारीख पर न्यायालय जाना था। उनका कहना है कि जब पत्नी से विवाद निपट गया था तो वह आत्महत्या क्यों करेगा।
कई सवालों के जवाब आने बाकी
इस मामले में कई सवालों के जवाब आने बाकी है। आशीष के पिता संजीव सिंह ने बताया कि आशीष की मंगलवार को ही न्यायालय में तलाक की तारीख थी। सुबह नौ बजे वह देवता पूजन करने खेत पर गया था। जब काफी देर तक वापस नहीं आया तो परिवार के ही छोटू नाम के बच्चे को देखने के लिए भेजा। जैसे ही वह मौके पर पहुंचा तो उसने पाया कि आशीष का खून से लथपथ शव खेत में पड़ा था। उसने तुरंत ही घर पर सूचना दी। परिजन और ग्रामीण खेत पर पहुंचे तो आशीष की कनपटी में गोली लगी थी। परिजनों का कहना है कि मौके पर संदिग्ध हालात थे। मौके पर न तो कोई तमंचा मिला और न कोई सुसाइड नोट, जिससे साबित हो कि उसने आत्महत्या की हो। जबकि पुलिस दावा कर रही है कि सिपाही ने खुद की कनपटी से तमंचा सटाकर गोली मार ली।
पुलिस यह भी दावा कर रही है कि सूचना देने वाले ने शव के पास तमंचा होना बताया था। पुलिस के पहुंचने से पहले तमंचा वहां से गायब कर दिया गया। सवाल उठता है कि आखिर तमंचे को वहां से किसने उठाया और क्यों। इसको लेकर भी गांव में अलग-अलग चर्चाएं हैं। परिजन हत्या और पुलिस आत्महत्या बताने में जुटी है। ऐसे में अभी पुलिस की जांच उलझी हुई है। मामला सिपाही की मौत से जुड़ा हुआ है, जिसके बारे में लखनऊ से भी पूछा गया है।
एसएसपी ने एक घंटा की परिजनों से बात
इस वारदात की जानकारी पर एसपी देहात अविनाश पांडेय ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, जबकि एसएसपी अजय साहनी मवाना थाने पहुंचे और आशीष के परिजनों को बुलाकर बंद कमरे में करीब एक घंटा तक वार्ता की। परिजनों ने हत्या होने की बात कही। फोरेंसिक टीम ने मौके पर जाकर जांच की तथा नमूने लिए।