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कारगिल में पति की शहादत के बाद बेटे को सेना में भेज पूरा किया संकल्प, मां की जीवटता सुन भावुक हो गए थे पीएम मोदी

Sun, 26 Jul 2020 05:26 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 26 Jul 2020 05:26 PM IST
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CourageInKargil: After the martyrdom of the husband in Kargil, Muzaffarnagar mother sent her son to the indian army
पीएम नरेंद्र मोदी भी हो गए थे भावुक - फोटो : amar ujala
एक मां की दृढ़ता, त्याग और जीवटता ने देशभक्ति का ऐसा जोश भरा कि बेटा भी आज कारगिल शहीद पिता की बटालियन में ही कैप्टन का फर्ज निभा रहा है। लांस नायक वचन सिंह की पत्नी कामेश बाला के धैर्य और देशप्रेम को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भावुक हो गए थे। 


 
CourageInKargil: After the martyrdom of the husband in Kargil, Muzaffarnagar mother sent her son to the indian army
capt. hitesh kumar - फोटो : अमर उजाला
भारत भूमि मां के त्याग और संघर्षों की अमिट यादें संजोए है। दृढ़ संकल्पित कामेश बाला बेमिसाल मां है, जिन्होंने कारगिल युद्ध में पति को खोने के बावजूद अपने पुत्र को सेना में ही सिरमौर बना दिया। सदर ब्लाक के गांव पचेंडा कलां की मिट्टी शहीद वचन सिंह की वीरता से महक रही है।

उनका जन्म किसान महावीर सिंह और रोशनी देवी के घर हुआ। बचपन से ही सेना में भर्ती का जुनून था। राजपूताना राइफल्स में देश सेवा का मौका मिलने के बाद उनकी शादी 10 फरवरी, 1990 को शाहपुर क्षेत्र के गांव कुटबी निवासी मनसुख की पुत्री कामेश बाला से हो गई। दंपती की खुशियों को पंख लग गए, जब घर में जुड़वा बेटे हुए थे। 

 
CourageInKargil: After the martyrdom of the husband in Kargil, Muzaffarnagar mother sent her son to the indian army
capt. hitesh kumar - फोटो : अमर उजाला

कारगिल युद्ध के दौरान लांस नायक वचन सिंह तोलोलिंग की चोटी पर 13 जून, 1999 को शहीद हो गए, तब कामेश बाला के बेटों की उम्र करीब साढ़े पांच साल की थी। जिंदगी की बेहद मुश्किल घड़ी में उन्होंने हौसला बटोरा। लांस नायक पति की यादों को ताकत बनाया और बेटों को सेना के लिए तैयार करने की ठानी।

दो साल पहले 9 जून, 2018 में हितेश को कमीशन मिला और वे लेफ्टिनेंट बने। बीते माह उन्हें कैप्टन पद मिला है। गत वर्ष दिल्ली में कारगिल विजय दिवस पर शहीद वचन सिंह की पत्नी कामेश बाला अपने पुत्र हितेश कुमार के साथ मंच पर पहुंची तो उनके त्याग और संकल्प को सुनकर पीएम नरेंद्र मोदी तथा तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष विपिन चंद्र रावत भी भावुक हो गए थे। हितेश के बाद अब उनकी इच्छा हेमंत को फौज में अफसर देखने की है। हेमंत भी स्नातक कर चुका है और सीडीएस के जरिये कामयाबी में जुटा है।

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CourageInKargil: After the martyrdom of the husband in Kargil, Muzaffarnagar mother sent her son to the indian army
capt. hitesh kumar - फोटो : अमर उजाला

समर्पण भाव से देश सेवा ही मकसद 
राजपूताना राइफल्स-टू के कैप्टन हितेश कुमार ने कड़ी मेहनत से मुकाम हासिल किया। उन्होंने शिमला हिल्स के राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल चेल से दसवीं पास की।

बाहरवीं कर्नाटक के बेलगांव स्थित आर्मी स्कूल से उत्तीर्ण की। डीयू के श्री राम कालेज से बीकॉम आनर्स के बाद वर्ष 2016 में सीडीएस (कम्बाइंड डिफेंस सर्विस) एंट्रेन्स एग्जाम क्वालीफाई किया। आईएमए, देहरादून से ट्रेंनिग पूरी की।
 

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मां के साथ कैप्टेन हितेश कुमार - फोटो : amar ujala

कहते हैं कि पिता की राजपूताना राइफल्स के कमांडिंग अफसर एम.बी. रविंद्रचंद्रन से मिलने की चाहत थी, मगर उनका हार्ट अटैक से निधन हो गया।

उन्हीं से सुनना चाहता था कि दुश्मन के सामने कारगिल में मेरे पिता किस जज्बे और वीरता से लड़े थे ? उनकी इच्छा है कि पिता की तरह समर्पण भाव से देश सेवा करें। पिता के बलिदान और मां के त्याग व प्रेरणा से ये मुकाम मिला है। वर्तमान में उनका परिवार शहर के आदर्श कालोनी में रहता है।

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