मेरठ में सोमवार को कोरोना से तीस वर्षीय प्रवीण कुमार की मौत हो गई। प्रवीण संक्रमण से लोगों को बचाने की कोशिश में जुटा था। वह मास्क बनाता था ताकि लोग संक्रमण की चपेट में न आ पाएं और उसकी आजीविका भी चलती रहे। लेकिन प्रवीण खुद ही संक्रमण की चपेट में आ गया। इस बात का पता न तो उसे खुद ही चला और न ही उसके परिवार वालों को। अचानक मौत आई और उसे उठाकर ले गई :-
कोरोना का कहर: ...जो बचाने के जतन में जुटा था, उसे ही उठाकर ले गई मौत, पति का आखिरी दीदार भी नहीं कर सकी पत्नी
शिव शक्ति नगर, खता रोड ब्रह्मपुरी निवासी प्रवीण पहले प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था। उसके भाई ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से वह घर पर ही मास्क बनाने का काम कर रहा था।
उसके भाई ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में सही तरीके से इलाज नहीं दिया गया। परिजन इलाज के लिए चिल्लाते रहे लेकिन प्रवीण को वेंटिलेटर पर शिफ्ट नहीं किया गया।
तीन दिन पहले प्रवीण को सांस लेने में तकलीफ हुई जिसके बाद उसे रोहटा रोड के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने उसे तीन दिन की दवा दी लेकिन उनसे आराम नहीं हुआ। इसके बाद मेडिकल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। मौत के बाद उसकी जांच रिपोर्ट में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी।
आखरी बार भी पति को नहीं देख सकी पत्नी
महामारी ऐसी है कि आखिरी सफर में भी अपनों का साथ नहीं मिल रहा। प्रवीण की मौत के बाद कोरोना की पुष्टि होने पर शव भी सीधे सूरजकुंड श्मशान घाट ले जाया गया। ऐसे में प्रवीण की पत्नी आखिरी दीदार भी नहीं कर सकीं। वह दूर खड़ी रही दहाड़े मारकर रोती-बिलखती रही।
भाई बोला, हम सहमे हुए हैं
प्रवीण के भाई ने कहा कि अब हमारा भी टेस्ट है। कोरोना वायरस निकलता है तो भर्ती भी कराया जाना चाहिए। डर लग रहा है कि मेडिकल कॉलेज में कैसे भर्ती होंगे क्योंकि वहां इलाज में लापरवाही की जा रही है।
प्रवीण के परिवार में पत्नी के अलावा पांच भाई और बाकी सदस्य हैं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ आर सी गुप्ता का कहना है कि प्रवीण को बचाने की तमाम कोशिशें की गई लेकिन नाकाम रहे। लापरवाही के आरोप बेबुनियाद और निराधार हैं
नए खतरे की तरफ इशारा कर रही है प्रवीण की मौत
मेरठ में इससे पहले 7 लोगों की मौत हो चुकी है। सभी मृतकों की उम्र 50 साल से ज्यादा थी और उन्हें हृदय किडनी और सांस लेने में भी परेशानी थी। प्रवीण की उम्र 30 साल थी। वह मेरठ में कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वालों में सबसे कम उम्र का है।
कहा जा रहा है कि कम उम्र के लोगों के लिए कोरोनावायरस इतना खतरनाक नहीं है लेकिन प्रवीण की मौत ने इस आरोप पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं और एक नए खतरे की तरफ इशारा किया है।