पड़ोसी राज्यों की सीमाएं लॉक होने के कारण हिमाचल, हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों से आकर जिले में फंसे सैकड़ों यात्रियों को शेल्टर कैंप का ही सहारा है। सहारनपुर में ऐसे ही सैकड़ों लोगों को अंबाला हाईवे पर बने डेरे पर आश्रय दिया गया है। यहां सरकार और सेवादारों के सहयोग से खाना और चिकित्सीय सेवाएं दी जा रही हैं। काफी संख्या में अन्य यात्री रैन बसेरों, खाली भवनों और सामाजिक संस्थाओं के यहां शरण लिए हुए हैं। इनमें अधिकतर श्रमिक सीतापुर, बस्ती, कानपुर, बनारस सहित अन्य जिलों के हैं। अब वे सीमाएं खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
लॉकडाउन में ऐसे हैं जिले के हालात, छलका महिला का दर्द, दिव्यांग को भी नहीं मिल रहा सहारा, तस्वीरें
पड़ोसी राज्यों की सीमाएं लॉक होने के कारण हिमाचल, हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों से आकर सहारनपुर में फंसे सैकड़ों यात्रियों को शेल्टर कैंप का ही सहारा है।
70 की उम्र में जयपाल को ग्रामीणों की चिंता
केस एक-
एक रेहड़ी में कुछ सब्जियां लेकर दिल्ली रोड से जा रहे 70 साल के जयपाल को परिवार के साथ ही ग्रामीणों की चिंता है। बादशाहपुर निवासी जयपाल कहते हैं कि शहर के लोग तो कुछ न कुछ इंतजाम कर लेते हैं लेकिन 10 से 20 किलोमीटर दूर तक बसे गांव वाले कहां जाएं। वह गांवों में पैदल घूमकर फल सब्जी बेचता है। आज इतनी सख्ती थी कि मंडी से सामान लाने में ही सात घंटे लग गए। इस उम्र में इतनी मेहनत करनी पड़ रही है।
कभी कार्ड मांगते हैं कभी आईडी, बस दौड़ ही लगा रहे
केस दो -
शिव विहार में कड़ी धूप में सिर पर खाली कैरट लेकर आ रही बीरमती रोकने पर गुस्सा जाहिर करने लगती है। कहती हैं कि वैसे तो घर पर सारा सामान लाने की बात कही जाती है। वह अपने मोहल्ले में सामान लाने के लिए सात दिन से भटक रही है। कभी कहते हैं कार्ड दिखाओ, कभी आईडी तो कभी पार्षद और अफसर के यहां जाने की बात की जा रही है। खाली कैरेट लिए दर-दर भटक रही हूं।
दिव्यांग को भी सहारा नहीं, न राशन न पेंशन
केस तीन-
शहर की वाल्मीकि बस्ती निवासी दिव्यांग सुरेंद्र भी सिस्टम बेहद दुखी हैं। वे कहते हैं कि वे ट्राई साइकिल पर गली- गली भटक रहे हैं। न तो किसी ने राशन पानी में सहयोग किया और न ही एडवांस पेंशन के नाम पर कुछ मिला है। हाल तो ये है कि दूरदराज की दुकानों तक को पास नहीं मिला। राशन लेने भी दो से पांच किलोमीटर तक जाना पड़ रहा है।
पांच घंटे सड़क पर सब्जी लिए बैठा रहा
केस चार-
आलू, प्याज सहित अन्य सब्जियों के कट्टे लिए धूप में बैठे युवक से यहां होने का कारण पूछा तो उसने बताया कि वह छिदबना गांव का रहने वाला है। गाड़ी में पंचर हो गया। रास्ते में किसी भी वाहन, पुलिस या सरकारी टीम का सहारा नहीं मिला। मजबूरी में पांच घंटे से बैठा हूं। अब पास से ही एक गाड़ी मंगवाई है।