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लॉकडाउन: दो दिन से भूखे हैं, नींद भी नहीं आती, अमर उजाला ने जाना हाल, दर्द बयां करते भर आईं लोगों की आंखें

Mon, 30 Mar 2020 05:36 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: कपिल kapil Updated Mon, 30 Mar 2020 05:36 PM IST
सार

अमर उजाला टीम ने शामली जिले की सड़कों पर अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे इन लोगों से बात की। किसी ने कहा जब से चले हैं, ना कुछ खाया, ना ही पानी पीया है। रास्ते में कुछ खाने को भी नहीं मिला।

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Lockdown Shamli Update, Peoples walking on foot in hungry at Shamli of Uttar Pradesh
भूखे पेट पैदल चल रहे लोग - फोटो : अमर उजाला

सैकड़ों मील का लंबा सफर, टूटा बदन, खाली जेब और भूख। लॉकडाउन के बाद पलायन कर अपने घरों को लौट रहे दिहाड़ी मजदूरों और कर्मचारियों की हालत बहुत खराब है। अमर उजाला टीम ने शामली जिले की सड़कों पर अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे इन लोगों से बात की। किसी ने कहा जब से चले हैं, ना कुछ खाया, ना ही पानी पीया है। रास्ते में कुछ खाने को भी नहीं मिला। कोई तो अपनी परेशानी बताते बताते रो पड़ा। पेश है एक रिपोर्ट...

Lockdown Shamli Update, Peoples walking on foot in hungry at Shamli of Uttar Pradesh
पैदल घर जाते लोग - फोटो : अमर उजाला

केस - 1
देहरादून के विकासनगर रोड पर स्थित गांव टिमली निवासी जाहिद ने बताया कि उसके गांव के छह लोग पानीपत के एक बड़े होटल में लॉड्री का काम करते हैं। सात हजार महीना और खाना पीना मिलता है। लॉकडाउन के बाद होटल बंद हो गया। तीन दिन जो घर में था वो खाया। शुक्रवार शाम को घर का राशन भी खत्म हो गया था। उनके मकान मालिकों ने भी निकाल दिया। महीने के आखिरी दिन चल रहे हैं जो जमा था वो भी खत्म हो गया। जेब खाली हो चुकी थी। शनिवार रात को भूखे पेट पानीपत से देहरादून के लिए चल दिए। रात को सिनौली गांव में कुछ देर लेटकर काटी लेकिन भूख के मारे नींद नहीं आई। सुबह चले तो कैराना में कुछ लोगों ने भोजन के पैकेट दिए जब भूख मिटी।

Lockdown Shamli Update, Peoples walking on foot in hungry at Shamli of Uttar Pradesh
पैदल जाते लोग - फोटो : अमर उजाला

केस - 2
कासगंज निवासी मोहित शामली में बस अड्डे के निकट अपने मामा मुकेश और भाई सेवाराम सहित 11 लोगों के साथ घर जाने के लिए किसी वाहन के इंतजार में खड़ा था। मोहित ने बताया कि वे पंजाब के पटियाला में छोले कुल्चे का ठेला लगाते थे। एक सप्ताह पहले से काम बंद हो गया। काम बंद होने के साथ खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा तो उन्होंने घर लौटने का निश्चय किया, लेकिन घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला तो पैदल ही चल दिए। हरियाणा से यमुना पुल पार करने के बाद रास्ते में लोगों ने उन्हें खाना खिलाया।

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Lockdown Shamli Update, Peoples walking on foot in hungry at Shamli of Uttar Pradesh
बेबस हैं ये लोग - फोटो : अमर उजाला

केस - 3
कन्नौज निवासी सुनील कुमार ने बताया कि वे पटियाला में फेरी लगाकर चूड़ी बेचने का काम करते थे। जब से लॉकडाउन हुआ तो काम बंद हो गया। अब घर जाने के सिवा उनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था। साधन न मिलने पर वे दो दिन से पैदल चलकर यहां तक पहुंचे। वहीं, मैनपुरी निवासी उदयवीर ने बताया कि वह पंजाब के पटियाला में फेरी लगाकर चूड़ी बेचता था। आठ दिन पहले काम बंद हो गया। इसलिए घर जाने के शनिवार को अपने साथी विनय के साथ पैदल ही निकल पड़ा। भूखे प्यासे हरियाणा बॉर्डर पर पहुंचा।

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पैदल घर जाते लोग - फोटो : अमर उजाला

केस - 4
कैराना में अपने 12 साथी श्रमिकों के साथ 650 किमी श्रावस्ती जा रहे शिव प्रसाद ने बताया कि वो सभी पानीपत में काम करते थे। 10 दिन से काम बंद होने के कारण पैसे भी खत्म हो गये। रात करीब तीन बजे वो सभी पानीपत से पैदल चले थे। रास्ते कमें कुछ नहीं खाया। वहीं, फर्रुखाबाद निवासी संजीव, उसका साथी छोटे लाल पैदल शामली की ओर जा रहे थे। बताया कि वो पानीपत में हैंडलूम पर काम करते थे। 10 दिन पहले मालिक ने काम बंद कर दिया था। सुबह चार बजे पानीपत से पैदल चले। अभी तक कुछ नहीं खाया।

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