बिजनौर के एक गांव में 10 हजार रुपये के विवाद में हंसता खेलता परिवार उजड़ गया। व्यक्ति अपनी पत्नी पर दस हजार रुपये वापस लाने का दबाव बना रहा था। इसी के चलते महिला ने पहले अपने दो बच्चों को नदी में फेंक दिया। फिर इसके बाद खुद भी तीन माह के मासूम को गोद में लेकर नदी में कूद गईं। इस घटना से गांव में गम का माहौल है। आगे तस्वीरों के साथ जानिए पूरा अपडेट-
मामूली विवाद में उजड़ गया हंसता खेलता परिवार, रह गया जिंदगी भर का गम, देखिए तस्वीरें
ये है मामला
गांव भरेकी में साढ़ू को दिए 10 हजार रुपये को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद चल रहा था। गौरव ने पुलिस को बताया कि उसका और सुनीता का विवाह सात साल पहले हुआ था। करीब दो साल पहले हल्दौर क्षेत्र के गांव कुम्हारपुर निवासी उसके साढ़ू मस्ता ने उससे दस हजार रुपये उधार लिए थे, लेकिन उसने पैसे नहीं लौटाए। उसने अपनी पत्नी से साढ़ू से पैसे लाने को कहा। इस बात को लेकर मंगलवार सुबह दोनों के बीच कहासुनी हो गई थी।
गौरव की बहन सानू ने बताया है कि गांव में कुछ महिलाओं ने समूह बना रखा है। सुनीता ने सोमवार को समूह से 35 हजार रुपये लेने के लिए फार्म भरा था। इस बात से गौरव नाराज हो गया। मंगलवार सुबह दोनों के बीच झगड़ा हुआ, उसके बाद गौरव पशुओं का चारा लेने के लिए खेतों पर चला गया। कुछ ही देर बाद उसे पत्नी के नदी में कूदने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही गौरव मौके पर पहुंचा। गौरव मेहनत मजदूरी करता है। गौरव के पिता के नाम करीब दो बीघा जमीन है।
मेहर की वजह से बच गई दीपक की जान
सुनीता पूरे परिवार का खात्मा करने के लिए ही घर से निकली थी। तीनों बच्चों को अपने साथ दवाई दिलाने के बहाने घर से निकल पड़ी। किसी परिजन व गांव वालों को यह शक नहीं होने दिया कि वह क्या करने जा रही है। नहर के पुल पर उसने पहले दीपक व ललित को नहर में फेंक दिया। बाद में तीन माह के आकांशु के साथ नहर में कूद गईं। पास के खेत में काम कर रहे मेहर ने अपनी जान की परवाह किए बगैर नहर के तेज बहाव पानी में कूदकर दीपक को बाहर निकाल लाया।
वहीं पुलिस ने बुधवार को गोताखोरों की मदद से महिला के शव को बरामद कर लिया है। डीएम रमाकांत पांडेय और एसपी धर्मवीर सिंह ने मंगलवार को घटना की जानकारी ली थी।