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किसानों के सिर माथे CM योगी का बयान, गन्ने के खेतों में खिलने लगे फूल, देखते रह जाएंगे ये तस्वीरें

Fri, 21 Dec 2018 08:54 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 21 Dec 2018 08:54 PM IST
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Baghpat, Yogi statement after farmers do not cultivate sugarcane, they are now cultivating flowers
फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला

गन्ने की पैदावार के लिए पहचान रखने वाले बागपत जिले में फूलों की खेती का चलन बढ़ गया है। मुनाफा मिलने से किसान उत्साहित हैं। यही वजह है कि पिछले साल के सापेक्ष इस बार फूलों की खेती का रकबा बढ़ गया है। दिल्ली और हरियाणा में अधिकतर गेंदे की सप्लाई की जा रही है, जिससे किसानों को लाभ हुआ है। बरनावा क्षेत्र फूलों की खेती का गढ़ बनकर उभरा है। यहां सैंकड़ों बीघा जमीन पर गेंदा फूल खिले हुए हैं।

Baghpat, Yogi statement after farmers do not cultivate sugarcane, they are now cultivating flowers
फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला
सिमटती जोत भी इसकी एक वजह है। किसान ठेके पर जमीन दे रहे हैं, जिसमें फूलों की खेती को प्राथमिकता दी जा रही है। सर्दियों में गेंदा फूल की डिमांड बढ़ जाती है, यही वजह है कि किसानों का रुझान फूलों की खेती की तरफ बढ़ा है। अमीनगर सराय, डौला, काठा, दाहा, पिलाना, घटोली, टीकरी में करीब चार सौ हेक्टेयर भूमि में फूल खिले हैं। गेंदा के अलावा रजनी गंधा, गलकटिया, गुलाब, ग्लेड, कोसमोसा प्रजाति के फूल तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन बहुतायत गेंदा की ही है।
Baghpat, Yogi statement after farmers do not cultivate sugarcane, they are now cultivating flowers
फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली और हरियाणा तक हो रही सप्लाई 
किसान बताते हैं कि दिल्ली के फतेहपुरी, खारी बावरी और गाजीपुर मंडी में फूलों की सप्लाई करते हैं। यहां सर्दियों में डिमांड अधिक रहती है और फूलों का भाव बदलता रहता है।

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Baghpat, Yogi statement after farmers do not cultivate sugarcane, they are now cultivating flowers
फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला

क्या कहते हैं किसान
किसान मुनेश रूहेला ने बताया किया किसान चीनी मिलों को अपना गन्ना देता है, लेकिन उसे समय पर उसकी फसल का भुगतान नहीं मिलता। वहीं गन्ने का भाव भी बहुत कम है। जबकि फूलों की खेती में ऐसा नहीं है, यहां रोज फसल के बदले पैसा हाथ में आ जाता है। मंडी में फूलों की डिमांड है।

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फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला

किसान सलेख कश्यप ने बताया कि परंपरागत खेती में अब किसानों को लागत भी नहीं मिल पाती है। सरकार के ढीले रैवये के कारण पिछले कई साल से किसानों को गन्ने का भुगतान भी नहीं हुआ है। इसी वजह से गन्ना और गेहूं की खेती छोड़कर फूलों की खेती की तरफ रुझान बढ़ रहा है।

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