अटल जी जैसा व्यक्तित्व सदियों में पैदा होता है। वह सहृदय थे और कार्यकर्ताओं की बात ध्यान से सुनकर उसका निराकरण करते थे। मेरी कई बार भेंट हुई। जब विधायक था तब एक दिन विधानसभा में वह राज्यपाल दीर्घा में आ गए। उसी दिन शाम को हमारी पूरी टीम को बुलवाया और कहा कि हाय हुल्लड़ क्यों करते हो। सदन की गरिमा का ध्यान रखो। धैर्य से काम करो। 2002 में मेरा टिकट कटा। उस चुनाव में उन्होंने विक्टोरिया पार्क में 9 फरवरी 2002 में रैली की थी। उसके बाद मेरठ नहीं आए। इससे पहले मैं सन् 1996 में उनके पास गया। कहा कि मेरा टिकट कट रहा है। उन्होंने आंकड़े देखकर कहा कि तुम्हारा टिकट कौन काट सकता है। मैं वापस चला तो बोले गजक नहीं लाए। दरअसल वे मेरठ की गजक के शौकीन थे। - अमित अग्रवाल, पूर्व विधायक
Pics: अटल जी थे गजक के शौकीन, उनके जीवन से जुड़ी 9 बड़ी बातें, एक क्लिक में पढ़ें
मुझे याद नहीं पर चाचा लक्ष्मीकांत वाजपेयी और परिवार के सभी लोग बताते हैं। सन् 1980 में भाजपा का मुंबई अधिवेशन हुआ था। हमारा पूरा परिवार वहां गया था। मैं उस समय डेढ़ साल का था। जैसे ही सब बाहर निकले तो अटल जी ने मुझे गोद में ले लिया। बोले कि यह हमारा सबसे छोटा कार्यकर्ता है। -विवेक वाजपेयी
हाईकोर्ट बेंच के मजबूत पक्षधर थे
वर्ष 1981 से पउप्र में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर चले आ रहे आन्दोलन को वाजपेयी ने बतौर सांसद राज्यसभा में 21 जुलाई 1986 को मजबूती से रखा था। उन्होंने कहा था कि मंत्री महोदय सालभर से संसद में कह रहे हैं कि जसवन्त सिंह आयोग की रिपोर्ट को राज्य सरकार को भेजा जा रहा है। लेकिन राज्य सरकारों से सुझाव आ चुके हैं। इसके बाद भी मामले में विलंब किया जा रहा है। इस कारण आंदोलन हो रहे हैं।
खूब किया चुनाव प्रचार
विधानसभा चुनाव 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कैंट विधानसभा की पूर्व विधायक शशि मित्तल के चुनाव प्रचार में यहां आए थे।
सरसावा में बनी जेल में रहे थे अटल
अयोध्या के विवादित ढांचे का विवाद चरम पर था, देश भर से राम मंदिर निर्माण को लेकर आंदोलन शुरू हो गया था। 1990 में लालकृष्ण आडवाणी रथयात्रा निकाल रहे थे। भाजपा ने इस मुद्दे को हवा दी थी। सपा सरकार ने कार सेवकों के साथ भाजपा नेताओं को भी गिरफ्तार करना शुरू कर दिया था। उसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी को भी सरसावा शुगर मिल में एक सप्ताह तक रखा गया था।