मेरठ में शनिवार को आशीष गुर्जर की हत्या के बाद गम और गुस्से के बीच करीब छह घंटे बाद पुलिस शव को अपने कब्जे में ले पाई। इससे पहले पुलिस अधिकारियों को कई बार मशक्कत करनी पड़ी। तीखी नारेबाजी और चीख पुकार मचने पर गांव में जातीय तनाव फैल गया। संघर्ष के हालात बनते देख शोभापुर गांव में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। देर रात तक इस मामले को लेकर पुलिस के पसीने छूटे रहे। देखें मौके की कुछ तस्वीरें -
आशीष गुर्जर हत्याकांड: रोष-आक्रोश के बीच हुआ शव का अंतिम संस्कार, गांव में तनाव बरकरार
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अस्पताल में मौत की पुष्टि होते ही आशीष के शव को परिजन दोपहर करीब 12:45 बजे रोहटा रोड स्थित राणा फार्म हाउस के पास अपने घर पर ले आए थे। आशीष की हत्या का पता चलते ही लोगों में आक्रोश फैल गया। गांव में चारों तरफ तरह-तरह का शोर मचने लगा। नारेबाजी और तीखे शब्दों से हो रहे एलान से जातीय तनाव व्याप्त हो गया। माहौल बिगड़ने के अंदेशे से ही पुलिस के हाथ पैर फूल गए। पुलिस आशीष का शव पोस्टमार्टम हाउस भेजने की जल्दबाजी करने लगी, जिससे माहौल और गर्मा गया। पीड़ित परिवार ने कह दिया कि शव तब उठेगा, जब हत्यारोपी पकड़े जाएंगे। पुलिस को आशीष का शव उठाने के लिए छह घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी।
परिचित लोगों को बुलाया
पीड़ित परिवार के परिचित पुलिस वालों को भी आशीष के घर पर बुलाया गया। एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर समेत कई पुलिस वालों ने आशीष के परिवार को समझाया कि कानूनी कार्रवाई होने दो। जीडी ऑनलाइन चलती है। जितनी देरी हो रही है उससे केस उतना कमजोर हो जाएगा। लेकिन पीड़ित परिवार की महिलाएं मानने को तैयार नहीं हुईं। उसके बाद पुलिस और जिम्मेदार लोगों ने जैसे तैसे कर महिलाओं को समझाकर शव पोस्टमार्टम हाउस भेजा।
तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए पुलिस फोर्स तैनात
एसपी सिटी और एसपी क्राइम ने शोभापुर गांव में माहौल को देखते चप्पे चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात कर दी। यह मामला दो जातियों के बीच का है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार माहौल खराब करने की कुछ लोग कोशिश कर सकते है। पुलिस ने आरोपी पक्ष के एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया है। इन लोगों को सुरक्षा की दृष्टि से दूसरे थानों में रखा गया है।
परिजनों ने लगाए आरोप
एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में दलित समाज के लोगों ने विगत दो अप्रैल 2018 को मेरठ समेत कई जनपदों में बखेड़ा किया था। हिंसा में बसपा नेता गोपी पारिया निवासी शोभापुर गांव कंकरखेड़ा समेत 120 लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज हुआ था। इसको लेकर शोभापुर में दलित-गुर्जर समाज के बीच तनाव पैदा हो गया था। चार अप्रैल 2018 को गोपी पारिया की हत्या हो गई थी। पुलिस ने आशीष गुर्जर, मनोज गुर्जर, कपिल गुर्जर और सुनील को जेल भेजा था। आशीष और सुनील दो महीने पहले ही जेल से छूटे थे। पुलिस के अनुसार आशीष के परिजनों का दावा है कि गोपी पारिया के समर्थकों ने एलान किया था कि हत्यारोपियों को नहीं छोडे़ंगे। पीड़ित पक्ष ने गोपी के भाई प्रशांत व गवाहों पर गोपी की हत्या का बदला लेने का आरोप लगाया है।