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मेरठ सर्पदंश हत्याकांड: दोषियों को फांसी की मांग, सजा तय होने से पहले आचरण-आर्थिक-मानसिक स्थिति का होगा आकलन

Thu, 08 Oct 2026 12:04 PM IST
Dimple Sirohi जेपी शर्मा, अमर उजाला, मेरठ
जेपी शर्मा, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 08 Oct 2026 12:04 PM IST
सार

अमित कश्यप हत्याकांड में एडीजीसी ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की। एडीजे ने सजा तय करने से पहले दोषियों के आचरण, आर्थिक-सामाजिक और मानसिक स्थिति का आकलन कराने के आदेश दिए हैं।

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Amit Kashyap Murder: Prosecution Seeks Death Penalty for Convicts; Court Orders Assessment Before Sentencing
कोर्ट में पेशी के दौरान आरोपी रविता व उसके प्रेमी - फोटो : अमर उजाला

अमित कश्यप हत्याकांड में दोनों दोषियों रविता और अमरदीप को दोषी करार दिए जाने के बाद अब सजा पर सुनवाई की तैयारी है। सुनवाई के दौरान एडीजीसी फरजाना मकसूद ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की अपील की। इस पर एडीजे ने दोषियों के आचरण, आर्थिक-सामाजिक स्थिति और मानसिक स्थिति का आकलन कराने के आदेश दिए हैं। अभियोजन के अनुसार, मामले में सीडीआर, मोबाइल लोकेशन, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान अहम साबित हुए।



1:50 बजे अमरदीप की लोकेशन अमित के घर पर मिली
जज ने फैसले में लिखा कि गवाह मुनेश के बयान से यह साबित हुआ कि अमरदीप को वारदात की रात अपने घर पर देखा गया था। मोबाइल फोन की सीडीआर और कॉल लोकेशन के अनुसार, रात करीब 1:50 बजे अमरदीप अमित और रविता के घर पर मौजूद था। इसके तुरंत बाद अमित की हत्या कर दी गई।

फैसले में अमरदीप द्वारा सपेरे से सांप खरीदने की बात का भी उल्लेख किया गया है। गवाह कृष्ण के बयान को अदालत ने इस तथ्य के समर्थन में महत्वपूर्ण माना। अभियोजन के अनुसार, हत्या के बाद मौत को सर्पदंश का रूप देने के लिए सांप को चारपाई पर छोड़ा गया था।

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Amit Kashyap Murder: Prosecution Seeks Death Penalty for Convicts; Court Orders Assessment Before Sentencing
सर्पदंश हत्याकांड में फैसला - फोटो : अमर उजाला

542 दिन और 86 तारीखों के बाद आया फैसला
पुलिस ने अमित की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद प्राथमिकी दर्ज की थी और 74 दिन में जांच पूरी कर आरोप-पत्र दाखिल किया था। इसके बाद मामले में 542 दिन और 86 तारीखों के बाद दोषसिद्धि का फैसला आया। अब अमित के परिजनों को दोनों दोषियों की सजा सुनाए जाने का इंतजार है।

अदालत के फैसले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना गया। गवाह मुनेश और मोनू कश्यप के बयानों तथा सीडीआर के आधार पर रविता और अमरदीप के संबंध और हत्या की वजह से जुड़े तथ्यों का उल्लेख किया गया। गवाह सुखपाल और पिंटू ने अमित की चारपाई से अमरदीप द्वारा खरीदे गए सांप की बरामदगी की पुष्टि की।

Amit Kashyap Murder: Prosecution Seeks Death Penalty for Convicts; Court Orders Assessment Before Sentencing
पति की हत्या करने के बाद उसे सांप से कटवाया - फोटो : अमर उजाला

संदेह से परे साबित हुआ मामला: अदालत
अदालत ने फैसले की प्रति में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित परिस्थितिजन्य साक्ष्य के सिद्धांतों के तहत मामला संदेह से परे साबित होता है। फैसले के अनुसार, अमित की गला दबाकर हत्या करने के बाद साक्ष्य छिपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए चारपाई पर सांप छोड़ा गया, ताकि मौत को सर्पदंश के रूप में दिखाया जा सके।

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Amit Kashyap Murder: Prosecution Seeks Death Penalty for Convicts; Court Orders Assessment Before Sentencing
सर्पदंश हत्याकांड, आरोपी रविता को लेकर जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला

बचाव पक्ष ने उठाए एफआईआर में देरी समेत कई सवाल
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ओमकार भाटी ने दलील दी कि घटना 12 अप्रैल की रात की है, जबकि एफआईआर 16 अप्रैल को दर्ज हुई। उन्होंने कहा कि प्रीतमनाथ ने बयान दिया था कि उन्होंने पांच साल से कोई सांप नहीं पकड़ा है।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि रविता और अमरदीप के मिलने-जुलने या आपत्तिजनक हालत में पकड़े जाने की बात एफआईआर और पुलिस को दिए बयानों में नहीं थी, बल्कि मुनेश ने अदालत में इसका उल्लेख किया। अधिवक्ता के अनुसार, मामले में कोई चश्मदीद या स्वतंत्र गवाह नहीं था और रविता व अमरदीप से कोई बरामदगी भी नहीं हुई।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि घटना की रात अमरदीप कई लोगों के साथ अपने घर में सोया था और किसी ने उसे रविता के घर आते-जाते नहीं देखा।

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सर्पदंश हत्याकांड -आरोपी प्रेमी - फोटो : अमर उजाला

सजा से पहले तीन स्तर पर होगा आकलन
एडीजीसी फरजाना मकसूद ने बताया कि एडीजे के आदेश के बाद दोषियों के आचरण की जानकारी के लिए जेल अधीक्षक, आर्थिक-सामाजिक स्थिति के आकलन के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी और मानसिक स्थिति के परीक्षण के लिए सीएमओ को पत्र भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि गंभीर अपराध में दोषसिद्ध अपराधियों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत यह आकलन कराया जा रहा है।

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