मेरठ में इंचौली थाना क्षेत्र के साधारणपुर गांव में लगातार 10 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों में कोहराम मचा है। अपनों को खो चुके कुछ परिवारों की महिलाएं और बच्चे दिनभर रोते बिलखते रहे तो कुछ में मातम पसरा रहा।
2 of 6
विलाप करते परिजन।
- फोटो : amar ujala
मरने वालों में सात लोग एक ही मोहल्ले के हैं। ये राज मिस्त्री थे। पड़ोसियों और अन्य ग्रामीणों ने पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी। गांव में लाला, महेंद्र, पंकज, अंकित सहित अन्य लोगों की स्थिति गंभीर बताई जा रही हैं। इनके परिजन दहशत में हैं।
3 of 6
विलाप करते परिजन।
- फोटो : amar ujala
ग्रामीणों ने चुनाव के समय शराब बांटने वाले प्रत्याशियों को कोसना शुरू कर दिया। वहीं, कुछ बुजुर्ग और जिम्मेदार लोग युवाओं को शराब की लत से दूर रहने की नसीहत दे रहे हैं। ग्रामीणों में इस बात का गुस्सा रहा कि पुलिस ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। यदि पुलिस और आबकारी विभाग सक्रिय रहता तो शायद इतनी जिंदगियां खत्म न होतीं।
4 of 6
गमजदा परिजन।
- फोटो : amar ujala
पुलिस ने बिना जांच कर दिया बीमारी से मौत का दावा
गांव में लगातार 10 लोगों की मौत के बावजूद पुलिस का रवैया सबसे हैरान करने वाला रहा। अपनी नाकामी छिपाने के लिए पुलिस खुद ही डॉक्टर बन गई और बिना जांच के ही दावा कर दिया कि ग्रामीणों की मौत बीमारी से हुई है। शवों का पोस्टमार्टम तक नहीं करवाया गया। अगर बीमारी से भी मौतें हुई हैं तो पुलिस ने पोस्टमार्टम क्यों नहीं करवाया।
5 of 6
मामले की जानकारी देते ग्रामीण।
- फोटो : amar ujala
वहीं, पुलिस और गांव के प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण पीड़ित परिवार भी खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं। सरकारी तंत्र इसी कोशिश में है कि कोरोना के शोर में शराब से मौतों का मामला दब जाए।