मेरठ के कबाड़ी बाजार में चल रहे कोठों पर कल से कार्रवाई शुरू होगी। डीएम अनिल ढींगरा ने इसे लेकर विधि विशेषज्ञों से राय लेकर तैयारी शुरू कर दी है। सबसे पहले कोठा संचालकों को नोटिस जारी किया जायेगा। उसके बाद इन्हें सील करने की कार्रवाई होगी। वहीं कबाड़ी बाजार स्थित कोठों का मामला जहां न्यायालय तक पहुंच गया। वहीं ऐसे में कई प्रदेश के पीड़ित परिवार अपनी अपहृत बेटियों को इस स्थान पर तलाश करते करते थक गए। न जाने कितनी ही बार यहां पीड़िताएं गुमनाम चिट्ठियों के जरिए लोगों मदद की गुहार लगाती रही हैं।
कबाड़ी बाजार के कोठों पर कल से कार्रवाई, यहां गुमनाम चिट्ठियों से दर्द बयां करती रही हैं पीड़िताएं
हाईकोर्ट में कबाड़ी बाजार में संचालित कोठों को लेकर जनहित याचिका दायर है। याचिका पर चल रही सुनवाई में सीएमओ की रिपोर्ट और एसएसपी के हलफनामे से पेच फंस गया है। जिस पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अब एसएसपी को 30 अप्रैल को जवाब दाखिल करना है। लेकिन इससे पहले ही डीएम ने कार्रवाई का मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है। डीएम ने बताया कि अब सभी पुराने मामलों की पत्रावली तलब की जा रही है।
इसके साथ ही जो कोठा संचालित हैं, उनकी सूची तैयार कराई गई है। सभी को नोटिस जारी किया जायेगा। नियम विरुद्ध संचालित कोठों को सील करने के साथ ही खाली भी कराया जायेगा। डीएम अनिल ढींगरा ने बताया कि मामले में 30 अप्रैल को होने वाली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट से जारी आदेश का भी इंतजार रहेगा। क्योंकि हाईकोर्ट के आदेश का प्राथमिकता से पालन कराया जायेगा।
प्रदेश के पीड़ित परिवार अपनी अपहृत बेटियों को कबाड़ी बाजार में तलाश करते हुए थक गए। कभी पुलिस के साथ बेटी को तलाशते रहे तो कभी निजी संस्था की मदद लेकर बेटी बरामद करने की मांग की। लेकिन अनैतिक देह व्यापार के धंधे में नाबालिगों को भी अपहरण करके बेचा गया। पुलिस लड़कियों को रेस्क्यू कराती रही, लेकिन आखिर इन लड़कियों को बेचने वाले कौन हैं, वे आज तक पुलिस के हत्थे तक नहीं चढ़े।
कबाड़ी बाजार में देहलीगेट और ब्रह्मपुरी थाने की सीमा क्षेत्र लगती है। कई बार थाना पुलिस की भूमिका पर भी यहां सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जब भी किसी भी लड़की को बंधक बनाकर देह व्यापार कराने की सूचना किसी निजी संस्था या पुलिस को मिलती है तो एंटी हृयूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना पुलिस कार्रवाई करती है। कोठों पर लड़कियां यहां गुमनाम चिट्ठी नीचे फेंककर भी बंधनमुक्त होने के लिए गुहार लगाती रहीं हैं। लेकिन कितने परिवार ऐसे हैं जिनकी बेटियां यहां बंधक मिली।