महराजगंज जिले के नौतनवां कस्बे की रहने वाली प्रीती यादव अपने संघर्षों की बुनियाद पर आगे बढ़ी तो पलट कर पीछे नहीं देखी। परिवार से मिले प्रोत्साहन ओर मार्गदर्शन से उनके राह की मुश्किल दूर होती चली गई। एअर होस्टेस बनकर अपनी सफलता की इबारत लिखते हुए क्षेत्र की बेटियों की रोल मॉडल बन चुकी हैं। वह बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहती हैं।
सपनों के लगे पंख: छोटे शहर से प्रीति ने भरी सफलता की ऊंची उड़ान, बन गई दूसरों के लिए मिसाल
भाई की सलाह पर एयर होस्टेस की पढ़ाई के लिए लखनऊ गई
प्रीति ने बताया कि शुरू में माता-पिता ने कान्वेंट स्कूल में दाखिला दिलाया, लेकिन बाद में आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर सरकारी स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद हमेशा मुझे शौक था कि मैं एयर इंडिया में काम करूं, लेकिन अवसर नहीं मिल रहा था। इसी बीच भाई की सलाह पर एयर होस्टेस की पढ़ाई के लिए लखनऊ गई।
वहां पढ़ाई करने के बाद भी चार साल तक कहीं नौकरी नहीं हुई। इस दौरान ग्रेजुएशन की पढ़ाई की फिर एयर होस्टेस बनने की आशा भी छोड़ दिया। फिर घर से शादी का भी दबाव बनने लगा। फिर मैंने निर्णय किया कि नहीं मुझे अपने दम पर कुछ करना है। क्योंकि, पापा-मम्मी का बहुत पैसा खर्च हो चुका है।
हिम्मत टूटी पर हौसला रहा बरकरार
प्रीति ने बताया कि करियर को लेकर अवसाद में भी चली गई थी। बहुत मुश्किल दिख रहा था सब। एक छोटे से गांव से निकलकर जब बड़े शहर में जाओ तो तमाम तरह की मुसीबतों का लोगों के तानों को सहना पड़ता है। लोग बहुत दबाने की कोशिश करते हैं कि तुम गांव से हो, तुम्हारा क्या एजुकेशन है, तुम्हारा बैकग्राउंड क्या है। इन सब के बावजूद मैंने चार साल तक सब्र रखा।
उन्होंने कहा कि इस दौरान मैंने कई जगह इंटरव्यू दिया। दिल्ली में छोटा-मोटा जॉब करती रही। फिर अंतिम समय था। वर्ष 2014 या तो जॉब होता या शादी। लेकिन किस्मत ने साथ दिया और स्पाइस जेट में जॉब लग गई। इसके बाद 2018 में एयर इंडिया में इंटरनेशनल फ्लीट में ज्वाइन किया। अब मैं इंटरनेशनल फ्लाइट करती हूं। परिवार के सहयोग से सब सम्भव हो पाया। अब मैं दिल्ली में रहती हूं।