लखीमपुर खीरी के दुधवा टाइगर रिजर्व के हाथियों में शुमार हथिनी दुर्गा के बचपन की कहानी बेहद मार्मिक है। दुर्गा को दक्षिण सोनारीपुर रेंज बेस कैंप के महावत इरशाद से मां और पिता दोनों का प्यार मिला। डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘द एलिफैंट व्हिसपरर्स’ के ऑस्कर जीतने के बाद दुर्गा भी चर्चा में है।
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एक रिश्ता ऐसा भी: इरशाद ने 'दुर्गा' को पाला, फुटबॉल की शौकीन, खेलने के लिए महावत को चारपाई से उठा देती है
Thu, 16 Mar 2023 04:54 PM IST
मुकेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 16 Mar 2023 04:54 PM IST
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महावत इरशाद को उठाती दुर्गा
- फोटो : अमर उजाला
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दुर्गा रोज खेलती है फुटबॉल
- फोटो : अमर उजाला
नौ अक्टूबर 2018 को दुधवा लाए जाते ही डीटीआर के तत्कालीन एफडी रमेश चंद्र पांडेय और दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक महावीर कौजलगि ने दुर्गा के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उसे सौंप दी। मैंने उसे कई दिनों तक रगड़-रगड़ कर नहलाया और उसके शरीर में लगे मधुमक्खियों के डंक निकाले। इस बीच दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ दयाशंकर बराबर दुर्गा की देखभाल और इलाज करते रहे।
वनकर्मी को दुलार करती दुर्गा
- फोटो : अमर उजाला
शुरुआती दौर में छह महीने तक उसे बोतल से दो डिब्बा दूध के पाउडर का घोल दिया जाता था। इसके बाद एक डिब्बा पाउडर के घोल के साथ ही तीन लीटर गाय का दूध और साढ़े तीन लीटर गाय के दूध में दलिया दी जाती थी। धीरे-धीरे दुर्गा की उम्र बढ़ने के साथ उसके आहार में बढ़ोतरी की। इसमें उसे दाल, चावल, गुड़ नमक, सेब, केला आदि फल दिए जाने लगे। अमानगढ़ से आने के बाद दुर्गा को 40 दिन तक दुधवा में अकेले रखा गया। प्रतिदिन उसके शरीर पर 100 ग्राम सरसों के तेल की मालिश की जाती थी।
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दुर्गा के साथ दुधवा के तत्कालीन एफडी रमेश पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे मादा हाथी रूपकली के साथ करीब साढ़े तीन साल तक दुधवा में रखा गया। रूपकली ने तो दुर्गा पर अपनी पूरी ममता उड़ेल दी। वह उसकी अपने बच्चों की तरह देखभाल करती थी। उसका साढ़े तीन साल का बचपन दुधवा में बीता। इसके बाद आठ फरवरी 2022 को दुर्गा को मादा हाथी रूपकली के साथ सलूकापुर बेंस कैंप भेजा गया।
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दुर्गा के साथ महावत इरशाद
- फोटो : अमर उजाला