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विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवसः आओ खुलकर बात करें, इस गलत सोच को छोड़ने का लें संकल्प

Tue, 28 May 2019 12:23 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 28 May 2019 12:23 AM IST
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World Menstruation Sanitation Day take oath to resolve wrong thinking
विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस
महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं और किशोरियों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसलिए हर वर्ष 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है।
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इस दिवस का उद्देश्य समाज में फैली मासिक धर्म संबंधी गलत अवधारणाओं को दूर करना, महिलाओं और किशोरियों को माहवारी प्रबंधन संबंधी सही जानकारी देना है। 28 मई की तारीख निर्धारित करने के पीछे मकसद है कि मई वर्ष का पांचवां महीना होता है। यह अमूमन प्रत्येक 28 दिनों के पश्चात होने वाले स्त्री के पांच दिनों के मासिक चक्र का परिचायक है।
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यूपी के कन्नौज जिले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि 28 मई को जिले के सभी अस्पतालों में विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाएगा। जागरुकता रैलियां  निकालकर किशोरियों और महिलाओं को मासिक धर्म के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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क्या है माहवारी

माहवारी नौ से 13 वर्ष की लड़कियों के शरीर में होने वाली एक सामान्य हार्मोनल प्रक्रिया है। इसकेे फलस्वरूप शरीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। यह प्राकृतिक प्रक्रिया सभी लड़कियों में किशोरावस्था के अंतिम चरण से शुरू होकर (रजस्वला) उनके संपूर्ण प्रजनन काल (रजोनिवृत्ति पूर्व) तक जारी रहती है। आज भी बहुत सी किशोरियां मासिक धर्म के कारण स्कूल नहीं जाती हैं। महिलाओं को आज भी इस मुद्दे पर बात करने में झिझक होती है। आधे से ज्यादा लोगों को लगता है कि मासिक धर्म अपराध है।

 
  • एनएएफएचएस 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 58 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग करती हैं। प्रदेश में यह आंकड़ा 47 प्रतिशत है।
  • महिलाओं की कुल जनसंख्या का 75 प्रतिशत आज भी गांवों में है। इनमें से देश में 48 प्रतिशत व प्रदेश में 40 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग करती हैं।
  • 44 प्रतिशत महिलाएं यह कहती हैं कि वे अपनी माहवारी प्रबंधन की सामग्री को धोकर पुन: उपयोग करती हैं।

इस विषय में बातचीत न करने की हिदायत दी जाती है

आज भी देश के कई परिवारों में लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान परिवार से अलग-थलग कर दिया जाता है। मंदिर जाने या पूजा करने की मनाही होती है। रसोई में प्रवेश वर्जित होता है। उनका बिस्तर अलग कर दिया जाता है। परिवार के किसी भी पुरुष सदस्य से इस विषय में बातचीत न करने की हिदायत दी जाती है।

मासिक धर्म को लेकर जागरूक होना जरूरी है। जिला महिला अस्पताल में तैनात डाक्टर मनप्रीत कहती हैं कि मासिक धर्म के बारे में बताने वाली सबसे अच्छी जगह स्कूल हैं। यहां  इस विषय को यौन शिक्षा और स्वच्छता से जोड़कर चर्चा की जा सकती है। साथ ही जागरूक और उत्साही शिक्षकों की जरूरत है, जो विद्यार्थियों को मासिक धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे सकें। वह कहती हैं कि घर में बच्चियों की मां भी इस बारे में अपनी सोच बदलें। इस बारे में अपनी बेटियों को ठीक से बताएं, ताकि उनकी बेटी को किसी के सामने शर्मिंदा न होना पड़े।
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