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कुछ ऐसे बदलेगी कानपुर के चमड़ा उद्योग की तस्वीर, मिलेगा 60 हजार लोगों को रोजगार 

Tue, 03 Jul 2018 09:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 03 Jul 2018 09:28 AM IST
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Will change the image of leather industry of Kanpur
डेमो पिक
केंद्र सरकार के 2300 करोड़ के पैकेज से कानपुर के चमड़ा कारोबार की तस्वीर बदल जाएगी। सब कुछ ठीक रहा तो अगले चार से पांच साल तक शहर में सालाना औसतन 15 फीसदी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मतलब तीन से चार साल में करीब 50 से 60 हजार लोगों को सिर्फ कानपुर में ही रोजगार मिल सकेगा। 

 
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वर्तमान में कानपुर शहर में करीब सवा लाख लोग प्रत्यक्ष रूप से चमड़ा उद्योग से जुड़े हैं। इनमें टेनरियां, चमड़े के प्रोसेसिंग हाउस, चमड़ा उत्पादों को बनाने वाली फैक्ट्रियां और इनके आउटलेट में काम करने वाले कर्मी व कामगार हैं। इसके अलावा शहर के ही करीब पांच हजार लोग चमड़ा कारोबारियों का काम विदेशों में संभाल रहे हैं। चमड़ा उद्योग इन दिनों कुशल कामगारों की कमी से जूझ रहा है।
 
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विदेशी मांग के अनुरूप न तो डिजाइनर मिल रहे हैं और न ही अत्याधुनिक मशीनों को चलाने के लिए टेक्नीशियन। चर्म निर्यात परिषद से जुड़े उद्यमियों का मानना है कि तीन साल के लिए देश को मिले 2300 करोड़ के पैकेज में करीब पांच से आठ सौ करोड़ रुपये शहर के हिस्से आएंगे। इस पैकेज से शहर के चमड़ा उद्योग को हाईटेक बनाया जाएगा।

 
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संसाधनों की कमी से जूझ रहे उद्योग को तकनीक और दक्षता का सहारा मिलने से लाभ बढ़ेगा। इकाइयों का विस्तार होगा। विदेशी मांग को समय पर पूरा किया जा सकेगा। उद्यमी आरके जालान का मानना है कि ऐसे माहौल में उत्पादन बढ़ाने के लिए हर साल औसतन 15 फीसदी यानी 18 से 20 हजार कामगारों की जरूरत बढ़ेगी। 
 
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ऐसे बढ़ेगा रोजगार
मेगा लेदर क्लस्टर की स्थापना से नई औद्योगिक इकाइयां आएंगी। एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत भी इकाइयों का विस्तार होगा। मुद्रा योजना के तहत जिले को मिले लक्ष्य में से 40 फीसदी हिस्सा चमड़ा उद्योग के लिए ही जाएगा। शहर में ही टेस्टिंग लैब शुरू होने से काम आसान होंगे। प्रदूषण की मार झेल रहीं इकाइयों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जाएगा। इससे कारोबार बढ़ेगा। टेनरियों में नई मशीन लगाने के लिए सब्सिडी मिल सकेगी। 
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