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अक्षय तृतीयाः 11 साल बाद होने वाला 'महा सिद्धि योग' होगा आपके 'शुभ', राशि के अनुसार करें ये खरीदारी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 14 Apr 2018 06:40 AM IST
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18 अप्रैल को अक्षय तृतीया है। 11 साल बाद इस बार अक्षय तृतीया पर महा सिद्धियोग बन रहा है। यानि पूरा समयकाल खरीदारी से लेकर हर कार्य के लिए शुभ है। आचार्य पंडित पवन शुक्ला के मुताबिक व्यापारिक दृष्टि से भी ये पर्व विशेष शुभ है। वैदिक मान्यता है कि इस दिन विवाह करने वालाें का अखंड सौभाग्य रहता है। इस दिन महालक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए विशेष पूजा पाठ करने का विधान भी है और सोना खरीदना अति शुभ माना जाता है।
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पं. शुक्ला के मुताबिक इस बार 11 साल बाद अक्षय तृतीया पर 24 घंटे का सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग बन रहा है। इसलिए मांगलिक कार्यों के लिए यह समय बहुत खास है। 18 अप्रैल को तृतीया तिथि 4.47 बजे से शुरू होकर रात 3.03 बजे तक रहेगी। इसमें दिनभर खरीदारी अथवा कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। इस बार अक्षय तृतीया अपार सुख-समृद्धि देने वाली होगी। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया कहते हैं। अक्षय का शाब्दिक अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो अर्थात जो स्थायी बना रहे। इस दिन मांगलिक कार्य, विवाह, गृह निर्माण, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा, व्यापार आरंभ, मुंडन संस्कार आदि का शुभ मुहूर्त है। इसके अलावा व्यापार के लिए भी यह दिन विशेष रहेगा।
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गर्मी को शांत करने वाली वस्तुओं का करें दान
अक्षय तृतीया के दिन गर्मी की ऋतु में खाने-पीने, पहनने आदि के काम आने वाली और गर्मी को शांत करने वाली सभी वस्तुओं का दान करना शुभ होता है। इसके अतिरिक्त इस दिन जौ, गेहूं, चने, दही, चावल, खिचड़ी, ईख (गन्ना) का रस, ठंडाई व दूध से बने हुए पदार्थ, सोना, कपड़े जल का घड़ा आदि दान दें। इस दिन पार्वती जी का पूजन भी करना शुभ है।
अक्षय तृतीया के दिन गर्मी की ऋतु में खाने-पीने, पहनने आदि के काम आने वाली और गर्मी को शांत करने वाली सभी वस्तुओं का दान करना शुभ होता है। इसके अतिरिक्त इस दिन जौ, गेहूं, चने, दही, चावल, खिचड़ी, ईख (गन्ना) का रस, ठंडाई व दूध से बने हुए पदार्थ, सोना, कपड़े जल का घड़ा आदि दान दें। इस दिन पार्वती जी का पूजन भी करना शुभ है।
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अक्षत तृतीया व्रत और पूजा
ब्रह्म मुहूर्त में स्नानादि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर व्रत या उपवास का संकल्प करें। पूजा स्थान पर विष्णु भगवान की मूर्ति या चित्र स्थापित कर पूजन आरंभ करें। भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं, तत्पश्चात उन्हें चंदन, पुष्पमाला अर्पित करें। पूजा में में जौ या जौ का सत्तू, चावल, ककड़ी और चने की दाल अर्पित करें तथा इनसे भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके साथ ही विष्णु की कथा व उनके विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। पूजा समाप्त होने के बाद भगवान को भोग लगाएं व प्रसाद सभी भक्तों में बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें। सुख शांति तथा सौभाग्य समृद्धि हेतु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती जी का पूजन विशेष रूप से किया जाता है। इस दिन किए गए कार्यों में शुभता प्राप्त होती है,भविष्य में उसके शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त में स्नानादि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर व्रत या उपवास का संकल्प करें। पूजा स्थान पर विष्णु भगवान की मूर्ति या चित्र स्थापित कर पूजन आरंभ करें। भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं, तत्पश्चात उन्हें चंदन, पुष्पमाला अर्पित करें। पूजा में में जौ या जौ का सत्तू, चावल, ककड़ी और चने की दाल अर्पित करें तथा इनसे भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके साथ ही विष्णु की कथा व उनके विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। पूजा समाप्त होने के बाद भगवान को भोग लगाएं व प्रसाद सभी भक्तों में बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें। सुख शांति तथा सौभाग्य समृद्धि हेतु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती जी का पूजन विशेष रूप से किया जाता है। इस दिन किए गए कार्यों में शुभता प्राप्त होती है,भविष्य में उसके शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
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पर्व का महत्व
अक्षय तृतीया का बहुत अधिक महत्व है। माना जाता है इस दिन बिना पंचांग या शुभ मुहूर्त देखे आप हर प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, वस्त्र आभूषण आदि की खरीदारी, जमीन या वाहन खरीद सकते हैं। पुराणों में इस दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान या अन्य किसी भी तरह का दान अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इतना ही नहीं इस दिन किए जाने वाला जप, तप, हवन, दान और पुण्य कार्य भी अक्षय हो जाते हैं। अगर यह तिथि रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए जाने वाले दान-पुण्य के कार्यों का फल और अधिक बढ़ जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के पूजन का विधान है।
अक्षय तृतीया का बहुत अधिक महत्व है। माना जाता है इस दिन बिना पंचांग या शुभ मुहूर्त देखे आप हर प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, वस्त्र आभूषण आदि की खरीदारी, जमीन या वाहन खरीद सकते हैं। पुराणों में इस दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान या अन्य किसी भी तरह का दान अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इतना ही नहीं इस दिन किए जाने वाला जप, तप, हवन, दान और पुण्य कार्य भी अक्षय हो जाते हैं। अगर यह तिथि रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए जाने वाले दान-पुण्य के कार्यों का फल और अधिक बढ़ जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के पूजन का विधान है।