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जिन सेमी ऑटोमेटिक राइफलों ने ली आठ पुलिस वालों की जान क्या उन्हें बेचने वाले गन हाउस को बचा रही है खाकी
Fri, 05 Mar 2021 04:09 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 05 Mar 2021 04:09 AM IST
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
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विकास दुबे के भाई दीपक दुबे और बदमाश शिव तिवारी को सेमी ऑटोमेटिक राइफल बेचने वाले गन हाउस मालिक पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस के पास गन हाउस मालिक के बारे में पूरी जानकारी है। दरअसल सेमी ऑटोमेटिक राइफल बगैर राज्यपाल की अनुमति के नहीं बेची जा सकती।
विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
गन हाउस मालिक ने विकास के साथ सांठगांठ कर पूरा खेल किया था। एसटीएफ ने इस संबंध में तमाम जानकारियां जुटाई हैं। दीपक दुबे और शिव तिवारी के पास राइफल का लाइसेंस था। मगर उसी लाइसेंस पर दोनों ने सेमी ऑटोमेटिक राइफल ले लीं। इस राइफल से एक बार में दस राउंड फायरिंग होती है। अमेरिका की बनी इस राइफल को खरीदने के लिए लंबी प्रक्रिया के बाद मंजूरी मिलती है। मगर इन दोनों ने गन हाउस से मिलीभगत कर बड़ी आसानी से राइफल खरीद ली।
विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
असलहों के मामले में कार्रवाई नहीं करना चाहती पुलिस
बिकरू कांड के बाद दो पहलुओं को पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया था। सबसे अहम था कि दहशतगर्दों के पास जो असलहे थे वो कहां हैं और इनके मददगार कौन थे। कई महीने बाद भी जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो एसटीएफ ने कमान संभाली।
बिकरू कांड के बाद दो पहलुओं को पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया था। सबसे अहम था कि दहशतगर्दों के पास जो असलहे थे वो कहां हैं और इनके मददगार कौन थे। कई महीने बाद भी जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो एसटीएफ ने कमान संभाली।
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अमर दुबे और विकास दुबे
- फोटो : सोशल मीडिया
चार दिन पहले एसटीएफ ने सात लोगों की गिरफ्तारी कर असलहे बरामद किए तो पता चला कि इन्हीं लोगों ने विकास, अमर और प्रभात को फरार कराने में भी मदद भी की थी। इस तरह से पुलिस का काम भी हल हो गया। अब गन हाउस मालिकों पर भी कार्रवाई करने से पुलिस पीछे हट रही है।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया मामले की जांच जारी है। जिसने भी अवैध तरीके से असलहे बेचे हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की टीम तथ्य जुटा रही है। किसी को छोड़ा नहीं गया है और न ही जाएगा। साक्ष्य इकट्ठा किए जा रहे हैं। जल्द कार्रवाई की जाएगी।