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Vikas Dubey: सरकार में सपा, बसपा या हो भाजपा, कायम रहा विकास का रसूख और दबदबा, यही कहता है 25 सालों का इतिहास
Wed, 08 Jul 2020 05:31 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 08 Jul 2020 05:31 PM IST
vikas dubey, rajnath singh, akhilesh yadav, mayawati
- फोटो : amar ujala
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विकास दुबे के कानपुर एनकाउंटर कांड ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को हिला कर रख दिया है। आठ पुलिस कर्मियों की मौत के जिम्मेदार विकास दुबे को फरार हुए चार दिन होने वाले हैं लेकिन पुलिस के हाथ खाली हैं। हम आपको विकास दुबे के राजनीतिक इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं। प्रदेश में सरकार बसपा की हो, सपा की हो या भाजपा की विकास का रसूख और दबदबा हमेशा कायम रहा।
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- फोटो : अमर उजाला
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का राजनीतिक इतिहास भी चौंकाने वाला है। यह जिस पार्टी की सरकार रहती है उसी पार्टी के दमदार नेताओं के संपर्क में रहकर अपनी सुरक्षा करता है। सबसे ज्यादा राजनीतिक पकड़ इसको बसपा की सरकार में मिली। तब से लेकर विकास दुबे सपा के कई प्रमुख नेताओं और भाजपा के भी कुछ नेताओं के संपर्क में रह रहा था।
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- फोटो : अमर उजाला
भाजपा के एक राष्ट्रीय स्तर के नेता की वजह से भारतीय जनता पार्टी में उसकी घुसपैठ पिछले 2 साल से नहीं हो पा रही थी। इसको लेकर विकास दुबे ने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक कई संपर्क निकालने की कोशिश की लेकिन भाजपा में उसकी घुसपैठ सीधे तौर पर नहीं हो पाई है, अभी भी वह इसके प्रयास में लगा हुआ था। भाजपा में घुसपैठ का इसका सीधा मतलब था कि वह अपनी सुरक्षा कर सके और अपने काले कारनामों को छुपा सके।
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- फोटो : amar ujala
बताया जा रहा है कि इससे अलग अपनी राजनीतिक पैठ बनाने के लिए विकास दुबे 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी भी कर रहा था और उसने भाजपा और बसपा दोनों पार्टियों पर अपनी निगाह लगा रखी है। करीबी सूत्रों के अनुसार वह रनिया से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर इस बार चुनाव को लेकर पूरी तैयारी में था। कुछ दिनों पहले बदमाशों के हाथों मारे गए पिंटू सेंगर और विकास दुबे दोनों अगल-बगल की विधानसभा को लेकर बसपा से ही तैयारी में जुटे थे।
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- फोटो : amar ujala
पिंटू सेंगर रसूलाबाद से और विकास दुबे रनिया से। विकास दुबे सबसे पहले उस समय चर्चा में आया जब शिवली में जूनियर हाई स्कूल के प्रिंसिपल से झगड़ा होने के बाद इसने उनका मर्डर कर दिया था। इसके बाद बसपा के कुछ नेताओं के बल पर इसने पुलिस से अपना बचाव भी कर लिया और अपना दबदबा भी बना लिया। इसके बाद वह एक के बाद एक हत्याओं में लिप्त होता चला गया।