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बिकरू कांड: दो आईपीएस अफसरों की भूमिका संदिग्ध, साजिश थी पुलिसकर्मियों की हत्या, हो सकता बड़ा खुलासा

Mon, 21 Sep 2020 06:11 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 21 Sep 2020 06:11 PM IST
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vikas dubey kanpur news: Suspected role of two IPS officers in Bikeru scandal
कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
बिकरू में हुई पुलिसकर्मियों की हत्या एक सुनियोजित साजिश थी। पुलिसकर्मियों की हत्या में दो आईपीएस अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध है। मैं आयोग को बयान देने को तैयार हूं। मुझे सरकारी गवाह बनाया जाए। यह बात अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट सौरभ भदौरिया ने बिकरू कांड की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग को दिए द्वितीय शपथपत्र में कही।


शपथपत्र में सौरभ ने कहा कि हिस्ट्रीशीटर व गैंगस्टर जयकांत बाजपेई ही विकास दुबे की पूरी काली कमाई को बाजार में लगाता था। विकास को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने वाला जयकांत ही था। विकास ने जयकांत और इसके गिरोह के नाम पर शस्त्र लाइसेंस, मकान व अन्य संपत्तियां खरीद रखी हैं।
vikas dubey kanpur news: Suspected role of two IPS officers in Bikeru scandal
विकास दुबे एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
विकास के प्रभाव के कारण ही मुकदमे होने के बावजूद जयकांत ने अपने व गिरोह के सदस्यों के नाम शस्त्र लाइसेंस, पासपोर्ट बनवाए। इसकी जांच में कई पुलिसकर्मी व प्रशासनिक अफसर दोषी पाए गए, कार्रवाई की अनुशंसा हुई लेकिन कार्रवाई न होने से इनके हौसले इतने बढ़ गए कि पुलिसकर्मियों की नृशंस हत्या कर दी।

हत्या में शामिल गिरोह के लोगों पर धारा 34 और रासुका की कार्रवाई न करना भी संदिग्ध है। सौरभ ने जय, उसकी पत्नी, संबंधियों व गिरोह को संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों की 2008 से कॉल डिटेल रिपोर्ट निकलवाने की बात भी कही।
vikas dubey kanpur news: Suspected role of two IPS officers in Bikeru scandal
विकास दुबे का एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
न्यायिक आयोग के अध्यक्ष बालकृष्ण चौहान, सदस्य शशिकांत अग्रवाल व केएल गुप्ता को संयुक्त रूप से दिए शपथपत्र के साथ सौरभ ने तत्कालीन आईजी आलोक सिंह द्वारा एएसपी कन्नौज केसी गोस्वामी से कराई गई जांच की रिपोर्ट, तत्कालीन कमिशभनर द्वारा कराई गई मजिस्ट्रेटी जांच की रिपोर्ट, जय बाजपेई और उसके साथी द्वारा बिकरू कांड में इस्तेमाल की गई सेमी ऑटोमैटिक राइफलों व हथियारों का प्रदर्शन करते हुए फोटो व वीडियो भी सौंपे। लगातार शिकायत के बाद भी इन हथियारों की बरामदगी न किए जाने की बात कही।

जानमाल की धमकी का भी आरोप
शपथपत्र में सौरभ ने आरोपियों पर धमकाने का भी आरोप लगाया। उसने कहा कि लगातार जानमाल की धमकी दी जा रही है। दो बार हमला भी हो चुका है। हत्या होती है तो जय व उसके गिरोह के सदस्यों के साथ संरक्षणदाता पुलिसकर्मियों को भी दोषी माना जाए। ये सभी बयान न देने और शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।
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कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
अक्टूबर से दर्ज होंगे बयान
सौरभ ने बताया कि न्यायिक आयोग के सामने जय और उसके गिरोह के खिलाफ की गई 117 शिकायतों में से 29 का ब्योरा उन्होंने सौंप दिया है। बाकी का ब्योरा भी जल्द देंगे। आयोग 13 लोगों को गवाह बना रहा है। सम्मन भेजने की कार्रवाई शुरू की जा रही है। अक्टूबर से बयान दर्ज होने लगेंगे। जय के मकान में अवैध रूप से रह रहे तीन दरोगाओं और आईजीआरएस पर झूठी रिपोर्ट देने वाले पुलिसकर्मी पर कार्रवाई के कुछ दिनों बाद ही उनकी बहाली का मामला भी आयोग के सामने उठाया है।
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कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
पुलिसकर्मियों की भूमिका की अलग से होगी जांच
सूत्रों की मानें तो न्यायिक आयोग विकास दुबे का 1998 से अब तक का पूरा इतिहास खंगाल रहा है। एक आम आदमी इतना बड़ा अपराधी कैसे बन गया। किन पुलिसकर्मियों का संरक्षण विकास को मिला। 1998 से अब तक चौबेपुर थाने में कौन-कौन पुलिसकर्मी तैनात रहे। इन सभी के विकास से संबंधों और भूमिका की अलग से जांच की जाएगी।

विकास के खिलाफ कितनी शिकायतें आईं, किन मामलों में जांच हुई, जांच रिपोर्ट का क्या हुआ, पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की। इन सभी पहलुओं का बारीक परीक्षण किया जाएगा। जेल में बंद रहने के दौरान विकास से मिलने वालों का ब्योरा भी मांगा गया है, उनकी भूमिका की भी जांच की जाएगी। विकास के गिरोह में शामिल सदस्य और उनके संरक्षणदाता पुलिसकर्मी भी आयोग की जांच के दायरे में हैं।
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