बिकरू कांड की चार्जशीट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। खुशी दुबे के नाबालिग साबित होने के 21 दिन बाद पुलिस ने इसको जांच में शामिल किया। इससे पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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विकास दुबे के साथ खुशी
- फोटो : अमर उजाला
आखिर इतने दिन बाद इस अहम तथ्य को विवेचना में शामिल क्यों किया। बिकरू गांव में दो जुलाई की रात विकास दुबे और उसके गुर्गों ने आठ पुलिसकर्मियों को मार दिया था। पुलिस ने इस मामले में खुशी दुबे को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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शादी में डांस करती खुशी
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बाद में पुलिस ने बेकसूर बता खुशी को रिहा कराने की बात कही थी लेकिन अचानक पुलिस अपने निर्णय से पलट गई थी। इधर किशोर न्याय बोर्ड ने खुशी को एक सितंबर को नाबालिग घोषित कर दिया।
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अमर दुबे और खुशी
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चार्जशीट में पुलिस ने जो तथ्य दर्ज किया है उससे पता चला कि 22 सितंबर को खुशी के नाबालिग साबित होने के तथ्य को पुलिस ने केस की विवेचना में शामिल किया। वहीं पुलिस ने खुशी और अमर दुबे की शादी का कोई जिक्र विवेचना में नहीं किया है। इसलिए इस संबंध में कोई साक्ष्य चार्जशीट में नहीं लगाए गए हैं।
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अमर और खुशी की शादी की फोटो
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आयोग ने दर्ज किए बयान
बदमाश अतुल दुबे और प्रेम कुमार पांडेय व प्रभात मिश्रा के एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों और फोरेंसिक टीम के विशेषज्ञ के बयान सोमवार को आयोग ने दर्ज किये। इंस्पेक्टर अजय सेठ और सर्विलांस के सिपाही जितेंद्र बदमाशों के एनकाउंटर करने वाली टीम में शामिल थे। आयोग ने लखनऊ में इन दोनों पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए। वहीं फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. पीके श्रीवास्तव के भी बयान लिए। मंगलवार को भी पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।